मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन चेयरमैन अशोक बालियान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखते हुए कहा है कि हाल में ही उत्तरप्रदेश के नोएडा में एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर द्वारा भारी कर्ज, अवसाद और वित्तीय संकट के कारण 43वीं मंजिल से कूदकर की गई आत्महत्या की हृदयविदारक घटना ने हम सभी को झकझोर कर रख दिया है। यह कोई अकेली घटना नहीं है; देश के विभिन्न शहरों से लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं जहाँ वित्तीय संकट के कारण मध्यमवर्गीय परिवार या उनके मुखिया आत्मघाती कदम उठा रहे हैं।
वर्तमान में हमारे प्रदेश में वह वर्ग, जो निजी कंपनियों में नौकरियां करता है या छोटे व्यापार चलाता है, अचानक आए किसी संकट (जैसे नौकरी छूटना, व्यापार में भारी घाटा, स्वास्थ्य संबंधी अप्रत्याशित खर्च या पारिवारिक विवादों में भारी कानूनी देनदारी) के समय पूरी तरह असहाय हो जाता है। इनके लिए दैनिक न्यूनतम घर खर्च या आकस्मिक वित्तीय मदद के लिए सरकार के पास कोई सीधा विभाग या फंड उपलब्ध नहीं है।

विकसित देशों (जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और जर्मनी) का अध्ययन करने पर पता चलता है कि वहां नागरिकों को अचानक सड़क पर आने और हताशा में आत्महत्या करने से बचाने के लिए एक बेहद मजबूत और संस्थागत व्यवस्था है। वहां की सरकारें:
1. बेरोजगारी बीमा (Unemployment Insurance): नौकरी जाने या व्यापार ठप होने पर पिछले वेतन का जर्मनी में 60% से 67%, अमेरिका में लगभग 40-50%) बेरोजगारी भत्ते के रूप में देना शुरू कर देती है। यह सहायता आमतौर पर 6 महीने से लेकर 2 साल तक जारी रहती है, ताकि व्यक्ति बिना घर खर्च की चिंता किए नई नौकरी ढूंढ सके या नया काम शुरू कर सके।
2. यूनिवर्सल क्रेडिट और हाउसिंग सपोर्ट (Universal Credit & Housing Support): यदि किसी व्यक्ति की आय न्यूनतम जीवन स्तर से नीचे चली जाती है, तो सरकार उसके घर का किराया (Housing Benefit) या ‘यूनिवर्सल क्रेडिट’ के तहत भोजन और उपयोगिता बिलों (बिजली, पानी) का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन करती है।
3. प्रक्रिया की गति: वहां आवेदन करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते; अधिकांश प्रणालियां पूरी तरह से ऑनलाइन और पारदर्शी हैं, जहां कुछ ही दिनों में सहायता बैंक खाते में आ जाती है।
4. बजट आवंटन: राज्य सरकार अपने वार्षिक बजट में से एक निश्चित राशि इस फंड के लिए आरक्षित कर सकती है।
इसके अलावा, राज्य में आने वाले कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का एक हिस्सा इसमें डलवाया जा सकता है।
5. तात्कालिक सहायता: इस फंड के माध्यम से गंभीर वित्तीय संकट या किसी आपदा के कारण आय शून्य होने पर परिवारों को 3 से 6 महीने तक का ‘न्यूनतम गुजारा भत्ता’ सीधे उनके खाते (DBT) में भेजा जा सकता है।
हमें पूरा विश्वास है कि आपके संवेदनशील और दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश के नौकरीपेशा नागरिकों और छोटे व्यापारियों के लिए एक मजबूत ‘आपातकालीन वित्तीय सुरक्षा तंत्र’ (Social Safety Net) और ‘संकटकालीन फंड’ की स्थापना के होने से निजी कंपनियों में नौकरी करने वाला वर्ग,उत्तरप्रदेश का मध्यम वर्ग और छोटा व्यापारी भी खुद को सुरक्षित महसूस कर सकेगा और भविष्य में किसी भी व्यक्ति या परिवार को आर्थिक तंगी के कारण अपनी जान नहीं गंवानी पड़ेगी।

यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा ने घोषित किए आठ उम्मीदवार
लखनऊ (रिपोर्टर)। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव के लिए भाजपा ने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पाण्डेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को प्रत्याशी






