मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। जानसठ रोड स्थित आशीर्वाद वेंकट हॉल में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्रीवृंदावन धाम से पधारे कथा व्यास आचार्य श्री धर्मेन्द्र उपाध्याय जी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कराया और भगवान के विभिन्न अवतारों का आध्यात्मिक महत्व विस्तार से समझाया।
कथा व्यास आचार्य धर्मेन्द्र उपाध्याय जी महाराज ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि जिस दिन से हमारे जीवन में श्रीकृष्ण की भक्ति प्रकट हो जाती है, उसी समय से हमारे जीवन के सभी संकटों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठाकर सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने जीवन में अनेक प्रकार की परेशानियों और चिंताओं से घिरा रहता है। धन, परिवार, प्रतिष्ठा और सांसारिक सुखों की प्राप्ति के लिए वह निरंतर प्रयास करता है, लेकिन वास्तविक शांति उसे भगवान की भक्ति और उनके चरणों में समर्पण से ही प्राप्त होती है। श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा दिखाती है तथा उसे धर्म और कर्म का महत्व समझाती है।
भगवान वामन के अवतार का भव्य स्वागत हुआ।

कथा के दौरान भगवान विष्णु के वामन अवतार का प्रसंग श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रस्तुत किया गया। आचार्य श्री धर्मेन्द्र उपाध्याय जी महाराज ने वामन अवतार की कथा का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए बताया कि भगवान ने धर्म की रक्षा और भक्तों का कल्याण करने के लिए समय-समय पर विभिन्न अवतार धारण किए। उन्होंने राजा बलि और भगवान वामन के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि राजा बलि अत्यंत पराक्रमी और दानी राजा थे। उनके दान और पराक्रम की चर्चा तीनों लोकों में होने लगी थी। भगवान वामन ने एक छोटे से ब्राह्मण बालक का रूप धारण कर राजा बलि से तीन पग भूमि का दान मांगा। राजा बलि ने अपना वचन निभाते हुए भगवान को तीन पग भूमि देने का संकल्प लिया।
कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को समझाया कि भगवान की लीला सामान्य बुद्धि से नहीं, बल्कि श्रद्धा और भक्ति से समझी जा सकती है। भगवान वामन अवतार हमें अहंकार का त्याग करने, अपने वचन का पालन करने और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देता है। वामन अवतार का प्रसंग सुनकर कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। भगवान वामन के जयकारों से कथा स्थल गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ भगवान का स्वागत किया और कथा का आनंद लिया। इस दौरान भजन-कीर्तन और भगवान के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

केवल भक्ति से ज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता : उमाकांतानंद सरस्वती
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। जूना अखाङा के महामंडलेश्वर संत उमाकांतानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जी मर्यादा और कृतित्व सिखाने के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के कान नहीं होते आंख होती हैं। आप जो व्यवहार करेंगे वही सीखेंगे। नई मंडी रामलीला भवन में आयोजित भगवान श्री राम कथा






