मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। समाज में आपसी भाईचारा, समानता और सद्भाव को मजबूत करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसी भावना को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता के भारतीय चिंतन पर सार्थक संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से ब्रह्मलीन महंत अवेद्रद्यनाथ जी महाराज की पुण्य स्मृति में ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन द्वारा मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय संगोष्ठी “सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ की भूमिका” का आयोजन किया जा रहा है।
ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस संगोष्ठी श्रृंखला के अंतर्गत प्रयागराज, लखनऊ, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, अम्बेडकर नगर, गाजियाबाद, जौनपुर, मेरठ एवं बागपत में कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में समानता, सद्भाव और सामाजिक एकता के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
मुजफ्फरनगर में आयोजित होने वाली संगोष्ठी में साध्वी प्रज्ञा आरती, महामंडलेश्वर संदीप खत्री महाराज एवं मंत्री कपिल देव अग्रवाल प्रमुख वक्ता के रूप में अपने विचार रखेंगे। फाउंडेशन के संस्थापक शशि प्रकाश सिंह ने समाजसेवी आलोक स्वरूप के आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि संगोष्ठी में गोरक्षपीठ के गौरवशाली इतिहास और समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने के लिए पीठ द्वारा किए गए ऐतिहासिक प्रयासों पर चर्चा होगी। साथ ही, सनातन परंपरा में निहित समरसता के मूल भाव, जिसका उल्लेख अनेक पौराणिक एवं धार्मिक ग्रंथों में मिलता है, पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

वक्ताओं द्वारा इस बात पर भी मंथन किया जाएगा कि आज के समय में जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर आपसी सम्मान, सहयोग और भाईचारे की भावना को मजबूत करना क्यों आवश्यक है। समरस समाज ही सशक्त समाज और मजबूत राष्ट्र की आधारशिला बन सकता है।
संगोष्ठी 5 अक्टूबर 2026, सोमवार को दोपहर 2:30 बजे लाला जगदीश प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर, जानसठ रोड, मुजफ्फरनगर में आयोजित होगी। ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन ने समाज के प्रबुद्धजनों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं एवं मीडिया प्रतिनिधियों से इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी में सहभागी बनने का आह्वान किया है। इस अवसर पर समाजसेवी आलोक स्वरूप, ललित महेश्वरी, प्रभाव स्वरूप, अभय जैन, नितिन तायल, मनोज सैनी, अखिलेश जाटव सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे ।

केवल भक्ति से ज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता : उमाकांतानंद सरस्वती
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। जूना अखाङा के महामंडलेश्वर संत उमाकांतानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जी मर्यादा और कृतित्व सिखाने के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के कान नहीं होते आंख होती हैं। आप जो व्यवहार करेंगे वही सीखेंगे। नई मंडी रामलीला भवन में आयोजित भगवान श्री राम कथा






