मुजफ्फरनगर। मोदी सरकार की पहल पर देश में गरीब परिवारों के अपने घर बनाने को शुरू की प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में मिलने वाली 2.5 लाख रुपये की मदद के लिए लोग दर-दर भटकने को विवश हैं, लेकिन इस योजना में सर्वेयर कंपनी ने दावा किया है कि नगरपालिका क्षेत्र में पीएम आवास योजना शहरी में आवेदन करने वाले 79 लोगों ने योजना का पैसा लेने से इंकार कर दिया है। अब इन्हें कर्टेलमेंट डीपीआर में डालकर इसका सत्यापन कराने की पालिका से मांग सर्वेयर कंपनी की ओर से की है ताकि इसका निस्तारण होने के बाद में पीएम आवास के नए आवेदकों की डीपीआर बनाकर स्वीकृति के लिए भेजी जा सके, लेकिन अपात्र ठहराए इन 79 लोगों की सूची में गड़बड़ मिली है। जांच में कई आवेदकों के फोन नम्बर फर्जी पाए जाने के बाद पालिका सूची का भौतिक सत्यापन कराये जाने का निर्णय लेते हुए सर्वेयर कंपनी से एक कर्मचारी की मांग की है। पीएम आवास योजना में डूडा संग काम कर रही सर्वेयर कंपनी के जिला समन्यक ब्रज देव ने बताया कि सभी नगरीय क्षेत्रों से बनी कर्टेलमेंट डीपीआर की जांच और स्वीकृति के बाद नई डीपीआर बनाने का काम शुरू होगा। कर्टेलमेंट डीपीआर में वो आवेदक शामिल हैं, जिनके द्वारा योजना में आवेदन स्वीकार होने के बाद पैसा लेने से इंकार किया है, जिन्हें अपात्रता श्रेणी में रखा है। नगरपालिका मुजफ्फरनगर के अन्तर्गत शहरी क्षेत्र में 4659 आवेदक इस कर्टेलमेंट डीपीआर में शामिल किए हैं, जोकि 2107 से 2024 तक के हैं। इनमें से 4580 पात्र पाए गए, वहीं 79 आवेदकों को अपात्रता की श्रेणी में रखा है। उन्होंने बताया कि कर्टेलमेंट डीपीआर में शामिल शहरी क्षेत्र के इन 79 अपात्र आवेदकों की जांच को पालिका को पत्रावली भेजी गई है। इसमें ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने टीएस नरेश शिवालिया को सूची का सत्यापन कराकर जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
बता दें, पीएम आवास योजना में केन्द्र सरकार की ओर से पात्र आवेदक को मकान बनाने के लिए ढाई लाख रुपये की सहायता दी जाती है। पहली किस्त में 50 हजार, दूसरी में डेढ़ लाख और तीसरी किस्त में 50 हजार रुपये दिए जाते हैं। आॅनलाइन आवेदन के बाद त्रिस्तरीय जांच होती है। इसमें नगर पालिका, तहसील और डूडा की ओर से सर्वेयर कंपनी के कर्मचारी जांच करते हैं। जिले में 7 हजार लोगों ने आवास के लिए आवेदन किए है, जो लंबित हैं। वहीं नई डीपीआर बनाने की कवायद शुरू की जा चुकी है।
इन्होंने कहा-
टीएस नरेश शिवालिया ने बताया कि पीएम आवास योजना के तहत सर्वेयर कंपनी के जिला समन्वयक की ओर से कर्टेलमेंट डीपीआर की पत्रावली पालिका को 79 अपात्रों की जांच करने के लिए दी थी। ईओ के आदेश पर अपात्रों की सूची अवलोकन करते हुए जांच प्रारम्भ कराई गई, जिसमें दिए कई फोन नम्बरों पर आवेदकों से सम्पर्क साधने का प्रयास किया, लेकिन सूची में दिये कई मोबाइल नम्बर फर्जी पाए गए हैं। ऐसे में फोन पर किसी से सम्पर्क नहीं हो पाने से भौतिक सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए लाइसेंस पटल पर कार्यरत बीसी सोनू मित्तल को लगाया है। वहीं सर्वेयर कंपनी से अपात्रों के पते की जानकारी के लिए एक कर्मी देने की मांग की गई है। अभी सर्वेयर कंपनी द्वारा अपना कर्मचारी नहीं दिया गया, जिससे भौतिक सत्यापन पूरा नहीं हो पाया है। जल्द ही सत्यापन कराकर रिपोर्ट ईओ को प्रेषित कर दी जायेगी।





