मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने कहा कि भारत में मुस्लिम शासनकाल में ध्वस्त किए गए मंदिरों के पुनर्स्थापना पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वैज्ञानिक सर्वेक्षण और ऐतिहासिक साक्ष्यों को मान्यता देते हुए, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले में भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर घोषित किया है। हमने अपनी पुस्तक ‘भारत में इस्लामी जिहाद और बलपूर्वक धर्मांतरण’ में लिखा है कि जिन ऐतिहासिक हिन्दू मंदिरों को इस्लामी शासनकाल में ध्वस्त किया गया था, उनकी पुनः प्राप्ति आपसी समझौते या न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होनी चाहिए, लेकिन मुस्लिम पक्ष ऐतिहासिक साक्ष्यों को मान्यता नहीं देता है। जबकि मुस्लिम पक्ष द्वारा ऐतिहासिक तथ्यों को खुलकर स्वीकार किया जाना चाहिए। इसीलिए हिन्दू पक्ष भारत में मुस्लिम शासनकाल में ध्वस्त किए गए जिन मंदिरों के प्रमाण (शिलालेख, अभिलेख, इतिहासकारों के लेखन, पुरातत्व विभाग की रिपोर्टें, और स्वयं उन स्थलों पर बचे अवशेष) उपलब्ध हैं, उन्हें न्याय व्यवस्था के माध्यम से पुनः प्राप्त करने के लिए न्यायालय के समक्ष अपनी बात रख रहा है।
मुस्लिम शासनकाल में भारत में मंदिरों का ध्वंस केवल धार्मिक नहीं था, बल्कि यह सांस्कृतिक आक्रमण भी था। इन मंदिरों की पुनः प्राप्ति केवल आस्था का प्रश्न नहीं, बल्कि इतिहास को न्याय देने का कार्य है। इस विषय पर सवाल मंदिरों की संख्या का नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व का होना चाहिए। स्पेन इसका स्पष्ट उदाहरण है। वहाँ मुस्लिम शासन (सन 711 से 1492) के दौरान चर्चों को तोड़कर उन पर मस्जिदें बनाई गईं थी। किंतु जब ईसाइयों ने सात सौ वर्षों के संघर्ष के बाद स्पेन को पुनः जीत लिया, तो उन्हीं मस्जिदों को वापस चर्चों में बदल दिया गया था। परिणामस्वरूप जो स्पेन कभी मुस्लिम शासन और इस्लामीकरण के कारण मुस्लिम राष्ट्र बन गया था, वही स्पेन सात शताब्दियों बाद पुनः पूर्णतः ईसाई राष्ट्र के रूप में स्थापित हो गया। वहाँ इसे ऐतिहासिक न्याय माना गया, न कि सांप्रदायिक संघर्ष। “स्पेन में जिन ईसाइयों को 750 वर्षों पूर्व बलपूर्वक मुस्लिम बनाया गया था, वे सन 1492 में पुनः अपने मूल धर्म ईसाई धर्म में लौट आए थे।भारत में यह तभी संभव है, जब जिनके पूर्वज बलपूर्वक धर्मांतरित किए गए थे, उन्हें अपने इतिहास और मूल संस्कृति की सच्चाई का पता चल जाए। इसके बाद जैसे स्पेन में 750 वर्ष बाद ईसाई अपने मूल धर्म में लौटे, वैसे ही भारत में भी अपने पूर्वजों की आस्था में व्यक्तिगत विवेक से वापसी संभव है।
भारत में मुस्लिम शासनकाल में ध्वस्त किए गए जिन मंदिरों के प्रमाण उपलब्ध हैं, वहां आपसी सहमति या न्याय व्यवस्था के माध्यम से पुन मन्दिर बनाने की हिन्दू समुदाय की मांग पर मुस्लिम समुदाय को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि जिन मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गईं, वे मंदिर केवल हिंदुओं के ही नहीं है, बल्कि आज के मुस्लिमों के पूर्वजों के भी थे। उस समय जबरन धर्मांतरण हुआ था, इसलिए इन स्थलों की पुनः प्राप्ति सभी के साझा पूर्वजों की संस्कृति और धरोहर को पुनर्जीवित करने का कार्य है।
योगासन खेल क्षेत्र से जुड़े दिवाकर कश्यप का हुआ योगासन टेक्निकल ऑफिशियल के रूप में चयन
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। जनपद के लिए यह गौरव का विषय है कि योगासन खेल क्षेत्र से जुड़े दिवाकर कश्यप का चयन योगासन भारत द्वारा टेक्निकल ऑफिशियल के रूप में किया गया। उन्हें तीसरे ऑल इंडिया पुलिस वेटलिफ्टिंग क्लस्टर-2026 के अंतर्गत आयोजित योगासन स्पोर्ट्स इवेंट में तकनीकी अधिकारी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह प्रतियोगिता 23






