मुजफ्फरनगर। भाजपा के वरिष्ठ नेता यशपाल बालियान ने एक विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि उत्तर प्रदेश का पश्चिम क्षेत्र अपनी बहादुरी, देश प्रेम, परिश्रम और संस्कारों से जाना जाता रहा है। यहां के बारे में कहा जाता है कि यहां के लोग बेहद मेहनती और तार्किक बुद्धि वाले हैं जो समय की नजाकत को तुरंत पहचान लेते हैं। पश्चिम क्षेत्र के लोगों को क्रांतिकारी स्वभाव का माना जाता है। यदि अस्मिता अथवा मान सम्मान की बात हो तो यहां के लोग किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। सामाजिक ताना-बाना और संस्कारों की लड़ी यहां पुराने समय से ही बहुत मजबूती रही है लेकिन आज के आधुनिक परिवेश में अनपेक्षित रूप में बदलती कुछ चीजें यहां के लोगों को असहज कर रही है। चूंकि यहां पर हमेशा सामाजिक खापों और सामाजिकता का प्रभाव रहा है फलस्वरूप आए दिन कोई ना कोई नया मुद्दा बनते देर नहीं लगती।
आज माननीय मुख्यमंत्री योगी की अपराध व भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति का भी पश्चिम क्षेत्र में कारगर होना दबंगई, जातियों में टकराव, अनैतिक संबंधों की घटनाओं का राजनीतिकरण होना, करना-खाना और भाईचारा छोड़कर किसी भी घटना को राजनीति के चश्मे से देखना आदि बातों के कारण चुनौती बना हुआ है ये बातें समाज को कमजोर और चिंतित कर रही है। पश्चिम क्षेत्र वह क्षेत्र रहा है जहां के शिक्षा संस्थानों से 70- 80 के दशक में निकले अध्यापकों, इंजीनियरों, भूमि से जुड़े लोक सेवकों ने लगभग समूचे उत्तर भारत में अपनी सेवाएं देकर एक मजबूत सामाजिक और आर्थिक आधार बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पश्चिमी क्षेत्र की क्रांतिकारी धरती आज अपनी मूल विशेषताओं और उपलब्धियों से विचलित होती प्रतीत होती है क्योंकि समूचे क्षेत्र में आए दिन किसानों, व्यापारियों, मजदूरों, धार्मिक एवं जातिगत संगठनों के धरनें-प्रदर्शन और आंदोलन हो रहे हैं। ऐसी चीजों का निरंतर होना किसी भी सभ्य समाज के लिए अच्छा नहीं माना जा सकता क्योंकि इससे सामाजिक और आर्थिक प्रगति बाधित होती है और कानून का शासन कमजोर दिखता प्रतीत होता है।
आज क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, लेखकों, पत्रकारों और प्रबुद्ध नागरिकों को अपने पश्चिम की परंपरागत मजबूतियों, संस्कारों, स्वभाव और पारस्परिक मेलजोल पर चिंतन करने की जरूरत है जिससे यह क्षेत्र अनावश्यक पचड़ों और विवादों से बाहर निकल कर आर्थिक मजबूती के साथ सुंदर सामाजिक वातावरण का निर्माण करता दिखाई दे!
आज बहुत जरूरी हो गया है गांवों की तरफ ध्यान देना जहां युवाओं में नशे और विकारों की लत तेजी से बढ़ रही है। आज गांवों में छोटी सी बात पर आपस में झगड़ा होना और उसके बाद पुलिस थानों और कोर्ट कचहरी तक की नौबत आना आम बात हो गई है जिससे सामाजिक और पारिवारिक ढांचा कमजोर हो रहा है। ग्राम प्रधान का पद जो गांव की जिम्मेदारी और सेवा के दायित्व का होता है उसका राजनीतिकरण हो गया है। हमें ग्राम स्तर पर मुख्य रूप से अपने अच्छे जीवन यापन हेतु खेती-मजदूरी, ग्रामीण कुटीर धंधों, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण और प्रदूषण मुक्त हवा पर बहुत ध्यान देने की जरूरत है। गांव के समग्र विकास के लिए ग्राम प्रधान को राजनीति से ऊपर उठकर गांव के भाईचारे, गांव के विकास और गांव की आर्थिक प्रगति पर फोकस करना होगा। ग्राम प्रधान द्वारा अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी और नैतिकता के साथ निभाने से निश्चित रूप से अपराध और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। अतः हम सभी एक अच्छी सोच और अच्छे लक्ष्य को ध्यान में रखकर गांव-कस्बों, जनपद, राज्य और देश की प्रगति में अपना आर्थिक और सामाजिक योगदान देने की सोच को साकार रूप दें!

अयोध्या कार सेवकों को निमंत्रण, वंदे भारत ट्रेन से हुए कार सेवक रवाना
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। अयोध्या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में वर्ष प्रतिपदा समारोह 19 मार्च 2026 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन पर मंदिर ट्रस्ट की ओर से मुजफ्फरनगर के 23 कार सेवकों को निमंत्रण पत्र भेजकर सादर आमंत्रित किया गया। जिस निमित नगर के 21 कार सेवक 18 मार्च को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े






