मुजफ्फरनगर। जनपद जाट महासभा के नाम और बैनर का एक व्यक्ति विशेष द्वारा संस्था के कालातीत घोषित होने के बावजूद अवैध उपयोग किए जाने को लेकर जाट महासभा के जिम्मेदार लोगों ने डीएम उमेश मिश्रा से मुलाकात की। इसके साथ ही जनपद जाट महासभा को पंजीकृत सामाजिक संस्था के दस्तावेज दिखाते हुए उसके संविधान के अनुसार प्रत्येक तीन वर्षों में नई कार्यकारिणी का गठन अनिवार्य बताते हुए इसमें दखल दिए जाने की मांग की।
गुरूवार को डीएम उमेश मिश्रा को सौंपे शिकायती पत्र में जनपद जाट महासभा के पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मवीर बालियान ने बताया कि वर्ष 2022 में कार्यकारिणी गठन के दौरान जगदीश बालियान द्वारा स्वयं को अध्यक्ष घोषित कर दिए जाने के कारण संस्था में विवाद उत्पन्न हो गया था। इस संदर्भ में जयवीर सिंह ने सहायक रजिस्ट्रार कार्यालय, सहारनपुर में शिकायत दर्ज कराई गई। जांचोपरांत संस्था संरक्षक मंडल द्वारा बहुमत के आधार पर जगदीश बालियान एवं उनकी समिति को अवैध घोषित कर बर्खास्त कर दिया गया तथा धर्मवीर बालियान को अध्यक्ष नियुक्त कर नई कार्यकारिणी भी गठित कर दी गई थी, जिसकी सूचना सहायक रजिस्ट्रार को भेज दी गई थी। उन्होंने बताया कि प्रकरण की जांच हेतु सहायक रजिस्ट्रार द्वारा एसडीएम सदर को पत्र भेजा गया। इस बीच 5 जून को संस्था कार्यकारिणियों का कार्यकाल समाप्त हो गया। दोनों पक्षों द्वारा सहायक रजिस्ट्रार को नये चुनाव की मांग की गई, जिस पर सहायक रजिस्ट्रार, सहारनपुर ने संस्था को “कालातीत” घोषित कर दिया तथा संस्था से संबंधित किसी भी प्रकार के नीतिगत निर्णय लेने पर रोक लगा दी। उन्होंने आरोप लगाया कि खेद का विषय है कि अब जगदीश बालियान ने उपरोक्त आदेशों की अवहेलना करते हुए संस्था के नाम व बैनर का उपयोग कर 14 सितम्बर को एक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है, जो पूर्णत: अवैध है। जनपद जाट महासभा ने इस कार्यक्रम को रोके जाने की मांग की। दोनों पक्षों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि संस्था के कालातीत होने की स्थिति में कोई भी पक्ष संस्था के नाम, पद, अथवा बैनर का उपयोग नहीं कर सकता। ऐसे में 14 सितम्बर को होने वाले प्रस्तावित कार्यक्रम को तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की। इस दौरान पूर्व महासचिव ओमकार अहलावत, जयवीर सिंह आदि मौजूद रहे।







