मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों के समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने संगठन की ओर से मांगों को लेकर सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया को सौंपे स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन में लंबित समस्याओं के निदान कराने की मांग की।
मंगलवार को संगठन के जिला अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन ने बताया कि 5 वर्ष पूर्व जो आंदोलन किया था और जो मांगें शासन स्तर पर मान ली गई थी, उन्हें लेकर पूर्व में हुए लिखित समझौते के बाद अधिकारियों ने धरने को समाप्त कराया, लेकिन आज 5 वर्ष बीत जाने के बाद भी वे मांगें पूरी नहीं की गई। इस ज्ञापन में सात सूत्रीय मांगों में प्रमुख मांग महंगाई भत्ता, आवासीय भत्ता, लॉयल्टी बोनस एवं म्यूचुअल ट्रांसफर आदि हैं। इस दौरान कोषाध्यक्ष डॉ. फैसल सिद्दीकी ने बताया कि मांग पत्र में नियमितिकरण संबंधित कोई मांग नहीं रखी गई है। वर्तमान में महंगाई को देखते हुए सभी मांगें जायज हैं। आशा संगिनी निर्मला देवी ने कहा कि सरकार हर काम की जिम्मेदारी आशाओं को दे तो देती है, लेकिन अभी आशाओं के लिए न्यूनतम मानदेय तय नहीं किया गया। महिला चिकित्सालय से डॉ. सुदेश वर्मा ने बताया कि म्यूचुअल ट्रांसफर पर रोक लगाये जाने के बाद से जो महिलाएं घर से दूर रहकर काम कर रही हैं, उन्हें बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं को नौकरी के साथ घर और बच्चों की जिम्मेदारी देखनी होती है। उसे देखते हुए म्यूचुअल ट्रांसफर पर रोक लगाना महिला कर्मियों के साथ में अन्याय है। इस दौरान एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. शमशेर ने बताया कि हर वर्ष 5 प्रतिशत की दर से मानदेय वृद्धि की जाती है, जबकि महंगाई को देखते हुए प्रति वर्ष 10 प्रतिशत की मानदेय वृद्धि जरुरी है। इस दौरान मुख्य रूप से बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरती ने भी विचार व्यक्त किए। ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से जिलाध्यक्ष डॉ. सचिन जैन, डॉ. फैसल सिद्दीकी, डॉ. प्रीति गर्ग, डॉ. सुदेश वर्मा, डॉ. फैसल परवेज, निर्मला देवी, तुलसी, स्वाति, रेखा, रचना, डॉ. आरती, डाइटिशियन नेहा त्यागी, स्टाफ नर्स रेनू रानी, कमल कुमार, अश्वनी कुमार, मोहित कुमार एवं फार्मासिस्ट सचिन कुमार आदि मौजूद रहे।







