मुजफ्फरनगर। देश के जाने-माने कथा वाचक एवं मानस मर्मज्ञ संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने कहा कि इस वक्त देश-प्रदेश में सरकार अच्छे कार्य कर रही है, जिसके आने वाले समय में सुखद परिणाम भी आएंगे। हालांकि उन्होंने वक्फ संशोधन कानून पर कहा कि यह संसद के द्वारा पारित संवैधानिक कानून है लेकिन इसे लागू करने से पूर्व व्यवहारिक, सैद्धांतिक व भावनात्मक तीनों पक्षों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
मुजफ्फरनगर में रुड़की रोड पर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं आयुष बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र शर्मा एवं महामृत्युंजय सेवा मिशन के संयोजक संजीव शंकर महाराज के आवास पर बीते दिवस पहुंचे संत प्रवर विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि प्रदेश और केंद्र की सरकार दोनों बहुत ठीक काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री पूरी तरह प्रामाणिक है, 24 कैरट प्रमाणिक है। उनकी नीयत भी प्रामाणिक है व उनकी इच्छा शक्ति भी प्रामाणिक है उनके परिश्रम भी प्रामाणिक है जिसके बहुत अच्छे परिणाम आएंगे।
संत प्रवर विजय कौशल जी महाराज ने वक्फ संशोधन कानून के बारे में कहा कि देश में जो कानून आया है वह संवैधानिक है, लोकसभा द्वारा पास किया गया हैै। उन्होंने कहा कि एक होता है व्यावहारिक पक्ष, एक होता है सैद्धांतिक पक्ष, एक होता है भावनात्मक पक्ष इन तीनों पक्षों को ध्यान में रखने के बाद ही कोई कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई बात सही है लेकिन लोक विरुद्ध है तो उसे नहीं करना चाहिए, यही शास्त्र का वचन है। उन्होंने कहा कि लिए गए निर्णय पर उनका कोई कमेंट नहीं है जो है वह ठीक है, लेकिन किसी एक विषय को लेकर देश में हर समय तनाव, झगड़ा फसाद आदि नहीं होना चाहिए। इससे देश व समाज का नुकसान होता है। समाज टूटता है और खाईयां बढ़ती है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने 400-500 वर्ष पूर्व मंदिर तोड़कर दूसरे धर्म के धर्म स्थल बनाए, उन्होंने पाप किया था वह तो पाप करके चले गए और हम भूल भी गए। बहुत प्राचीन 400-500 वर्ष पूर्व घटनाएं हो गई उन्हें उठाकर कुरेदना ठीक नहीं, अगर ऐसा वातावरण बना ताकि सहमति से हिंदुओं की जो चीज वापस मिले तो सही रहेगा। इस पर सीधे तौर पर वह कोई कोई कमेंट नहीं करेंगे। इस दौरान संत प्रवर विजय कौशल जी महाराज ने महामृत्युंजय सेवा मिशन के संयोजक संजीव शंकर महाराज को अपनी शुभकामनाएं दी। इससे पूर्व यहां पहुंचने पर पूर्व पालिका अध्यक्ष डॉ. सुभाष शर्मा, संजीव शंकर महाराज, आशुतोष शर्मा, शलभ कौशिक एड., डॉ. श्वेता कौशिक, जानकी कौशिक, डॉ. सुधीर दत्त भारद्वाज एवं रीता भारद्वाज ने उनकी अगवानी कर आशीर्वाद लिया।






