मुजफ्फरनगर। पालिका की 17 मार्किट की 509 दुकानों व 173 क्वार्टरों में बतौर किरायेदार ंप्रकरणों का निस्तारण करने के लिए लाई नई किराया नियमावली को लेकर शुरू सुनवाई की दूसरी बैठक में पालिका मार्किटों के किरायेदार व्यापारी एकमत नजर नहीं आये। व्यापारियों में कई मुद्दों को लेकर बिखराव दिखाई दिया। आपत्तियों पर सुनवाई के दौरान व्यापारियों ने स्पष्ट कर दिया कि उन्हें पालिका का 1977 से किराया निर्धारण का प्रस्ताव मंजूर नहीं है, तो कुछ व्यापारियों ने वर्तमान से ही किराया लागू करते हुए वसूलने का सुझाव दिया।
पालिका चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप द्वारा पालिका मार्किट के किरायेदारों के करीब तीन दशकों से लंबित प्रकरणों का निस्तारण कराने को बोर्ड बैठक में टैक्स विभाग की ओर से प्रस्ताव 402 के तहत नई किराया नियमावली को सदन में प्रस्तुत किया, जिसे बोर्ड ने अपनी सहमति प्रदान कर दी। नई नियमावली में पालिका की संपत्तियों में अवैध किरायेदारों का विनियमितीकरण करने को नामांतरण शुल्क के साथ किराये में 01 सितम्बर 1977 को जारी शासनादेश को आधार बनाते हुए 50 प्रतिशत की वृद्धि करने का प्रस्ताव करते हुए आपत्ति मांगी। आपत्तियों का निस्तारण करने के लिए चेयरपर्सन ने समिति का गठन किया, जिसमें सभासद राजीव शर्मा, देवेश कौशिक और बबीता वर्मा एवं कर निर्धारण अधिकारी दिनेश यादव को शामिल किया गया है।
बुधवार में समिति ने आपत्तियों पर दूसरी सुनवाई बैठक में इन मार्किट के किरायेदार व्यापारी पालिका के किराया बढ़ोतरी के प्रस्ताव व दूसरे नियमों को लेकर एकमत नहीं दिखे। 50 फीसदी किराया वृद्धि का विरोध करने के साथ व्यापारियों ने यह साफ किया कि वे 1977 शासनादेश या 2014 के पारित प्रस्ताव के आधार पर किराया वृद्धि को स्वीकार नहीं करेंगे। व्यापारी किरायेदार जयकुमार ने सुनवाई के दौरान कहा कि वो 1974 से पालिका के दुकान आवंटी के रूप में किरायेदार हैं, वो 1977 से किराया निर्धारण नहीं करायेंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि किराया तय करने का आधार वर्तमान को माना जाना चाहिए। इसके साथ ही कई बिन्दुओं पर भी व्यापारियों ने अपनी बात रखी और पालिका की इस नई नियमावली का मुखर विरोध किया। इस दौरान दौरान प्रवीण जैन चीनू, संजय नारंग, वीरेन्द्र अरोरा, जसप्रीत सिंह, जय कुमार, किरण पाल, भानु प्रताप अरोरा, दीपक कुमार, शिशुकांत गर्ग, विजय तनेजा आदि व्यापारी मौजूद रहे।
इन्होंने कहा-
कर निर्धारण अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि व्यापारियों की आपत्तियों पर तथ्यात्मक मत प्राप्त किया, आपत्तियों के समर्थन में उनसे लिखित साक्ष्य शासनादेश आदि मांगे, जो वो प्रस्तुत नहीं कर पाये। सुनवाई के लिए 20 फरवरी का भी दिन तय है, समिति इसके लिए सभागार में उपलब्ध रहेगी। हालांकि व्यापारियों के आग्रह पर आज सुनवाई का कार्य पूर्ण किया है। इसके बाद 24 फरवरी को समिति की बैठक में आपत्तियों और सुझावों पर चर्चा करते हुए अपनी रिपोर्ट तैयार की जायेगी, जिसे चेयरपर्सन को सौंपा जायेगा। इसके बाद यह रिपोर्ट अनुमोदन के लिए बोर्ड बैठक में प्रस्तुत की जायेगी। सदन की सहमति बनने के लिए इसको स्वीकृति के लिए शासन में भेजा जायेगा। वहां से अनुमति प्राप्त होने पर इसे लागू करने के लिए गजट प्रकाशन कराया जायेगा।







