मुजफ्फरनगर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा के निर्देश पर खतौली तहसील में प्राप्त हुई शिकायत के आधार पर जिला कृषि अधिकारी ने खतौली गन्ना समिति के ब्रजवीर सिंह पुत्र स्व. राजू के विरूद्ध स्थानीय खतौली थाने में उर्वरक नियंत्रण आदेश- 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के प्राविधानों के अन्तर्गत प्राथमिकी दर्ज कराई है। कृषि अधिकारी द्वारा रबी अभियान में कृषकों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराने के उदेश्य से सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड खतौली पर उर्वरक गोदाम का औचक निरीक्षण किया था, जहां निरीक्षण के समय टीम को डीएपी उर्वरक की भौतिक एवं पोस मशीन में पाई भिन्नता के बारे में जानकारी चाही, जिस पर उनके द्वारा उक्त के संबंध में कोई भी सन्तोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। ऐसे में स्पष्ट है कि समिति द्वारा डीएपी उर्वरक की कालाबाजारी कर रही है।
डीएम उमेश मिश्रा के निर्देश पर जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया ने संबंधित से स्पष्टीकरण साक्ष्यों सहित उपलब्ध कराने को कार्यालय द्वारा पत्र निर्गत किया एवं पुन: निरीक्षण के समय मौके पर उर्वरक स्टॉक डीएपी उर्वरक 95.55 मैट्रिक टन पोस मशीन और भौतिक रूप से 74 मैट्रिक टन उपलब्ध मिला, यूरिया उर्वरक 98.55 मैट्रिक टन पोस मशीन एवं भौतिक रूप में 98.55 मैट्रिक टन उपलब्ध मिला। एनपीके उर्वरक 53.1 मैट्रिक टन पोस मशीन और भौतिक रूप से भी 53.1 मैट्रिक टन उपलब्ध मिला। इस प्रकार समिति के गोदाम पर डीएपी उर्वरक में 21.55 मैट्रिक टन (431 बैग) का अन्तर पाया, जिससे स्पष्ट हो रहा है कि उक्त स्टॉक समिति द्वारा गलत तरीके से बेच दिया गया अथवा खुर्द-बुर्द कर दिया गया। जोकि स्पष्ट रूप से (आकर्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) (नियंत्रण) आदेश, 1985 का उल्लघंन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निरीक्षण के दौरान उपलब्ध भौतिक संभार में भिन्नता या किसी प्रकार की अनियमितता पायी जाती है तो तदनुसार सक्षम प्राधिकारी के स्तर से सम्बन्धित उर्वरक विक्रेता के विरुद्ध जांच के उपरांत उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अन्तर्गत कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि जांच में मिली खामी के आधार पर कर्मचारी गोदाम कीपर ब्रजवीर सिंह के विरूद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की धारा-7 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अन्तर्गत प्रथम सूचना प्राथमिकी दर्ज कराते हुए प्रशासन से सख्ती के संकेत दिए हैं।






