मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। श्रीराम कॉलेज, मुजफ्फरनगर में “वर्चुअल- लैब एन इनिशिएटिव ऑफ मिनिस्ट्री ऑफ एडुकेशन” विषय पर एक ओरिएंटेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह पहल नेशनल मिशन ऑफ एजुकेशन थ्रोग इन्फोर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के अंतर्गत संचालित की जा रही है। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को वर्चुअल लैब के प्रभावी उपयोग की जानकारी प्रदान करना तथा इसके माध्यम से विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक शिक्षा से जोड़ना रहा।इस अवसर पर श्रीराम कॉलेज की प्राचार्या डॉ. प्रेरणा मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी संसाधनों का प्रयोग निरंतर बढ़ रहा है। वर्चुअल लैब जैसी पहल विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षण पद्धति के साथ-साथ आधुनिक एवं डिजिटल माध्यमों से सीखने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि प्रयोगात्मक विषयों को समझने में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है और वर्चुअल लैब इस दिशा में एक उपयोगी माध्यम के रूप में कार्य कर सकती है। उन्होंने सभी शिक्षकों का आह्वान किया कि वे वर्चुअल लैब में उपलब्ध संसाधनों का अधिक से अधिक उपयोग करते हुए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रयोगात्मक शिक्षा से जोड़ें।श्रीराम कॉलेज के वर्चुअल लैब के नोडल समन्वयक डॉ. विपिन कुमार सैनी ने उपस्थित शिक्षकों को वर्चुअल लैब के विभिन्न संसाधनों एवं उनकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्चुअल लैब विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण सहायक उपकरण के रूप में कार्य करती है। इसके माध्यम से विद्यार्थी अपने मोबाइल फोन, लैपटॉप अथवा कंप्यूटर के माध्यम से कहीं से भी विभिन्न प्रयोगों को सीख और समझ सकते हैं।
कम समय में सीखना
डॉ. विपिन कुमार सैनी ने बताया कि वर्चुअल लैब के माध्यम से विद्यार्थी कम समय में सरल एवं सुविधाजनक तरीके से प्रयोगों की प्रक्रिया को समझ सकते हैं। विशेष रूप से ऐसे विद्यार्थी, जो किसी कारणवश भौतिक प्रयोगशाला की सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं, उनके लिए यह तकनीक प्रयोगात्मक ज्ञान प्राप्त करने का उपयोगी माध्यम बन सकती है। उन्होंने बताया कि वर्चुअल लैब में विभिन्न विषयों से संबंधित प्रयोग एवं अध्ययन सामग्री उपलब्ध है, जिनमें भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान तथा जैविक विज्ञान जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं। इन संसाधनों के माध्यम से शिक्षक अपने-अपने विषय एवं क्षेत्र के अनुसार विद्यार्थियों को विभिन्न प्रयोगों की जानकारी प्रदान कर सकते हैं तथा उनकी प्रयोगात्मक समझ को विकसित कर सकते हैं।कार्यशाला के दौरान सभी शिक्षकों को वर्चुअल लैब को ऑनलाइन संचालित करने की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। शिक्षकों को वर्चुअल लैब के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर विषय एवं प्रयोग का चयन करने, उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करने, ऑनलाइन सिमुलेशन के माध्यम से प्रयोग कराने तथा प्रयोग के परिणामों का अध्ययन करने की पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से समझाई गई। साथ ही, शिक्षकों को यह भी प्रशिक्षण दिया गया कि वे विद्यार्थियों को किस प्रकार वर्चुअल लैब से जोड़कर उन्हें ऑनलाइन माध्यम से प्रयोगात्मक शिक्षा प्रदान कर सकते हैं।डीन (प्फ।ब्) डॉ. विनीत कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में नवीन तकनीकों का समावेश आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्चुअल लैब शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को प्रयोगों को डिजिटल माध्यम से समझने और उनका अभ्यास करने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने शिक्षकों को प्रेरित किया कि वे अपने नियमित शिक्षण में उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का प्रभावी उपयोग करें, जिससे विद्यार्थियों में विषय की व्यावहारिक समझ के साथ-साथ तकनीकी दक्षता भी विकसित हो सके। उन्होंने कार्यशाला के आयोजन को शिक्षकों के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षण की गुणवत्ता को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होते हैं।डॉ. विपिन कुमार सैनी ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में तकनीक शिक्षा को अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वर्चुअल लैब विद्यार्थियों को प्रयोगशाला की अवधारणाओं को समझने और प्रयोगों का अभ्यास करने का अवसर प्रदान करती है। इससे विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार प्रयोगों को बार-बार देखकर और समझकर अपनी विषयगत एवं प्रयोगात्मक समझ को मजबूत कर सकते हैं।
शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण
उन्होंने कहा कि नेशनल मिशन ऑफ एजुकेशन थ्रोग आईसीटी के अंतर्गत संचालित यह पहल शिक्षा में तकनीकी संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसका लाभ विद्यार्थियों तक पहुँचाने में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी शिक्षकों को वर्चुअल लैब के संसाधनों एवं इसके ऑनलाइन संचालन की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे इसे अपने शिक्षण में प्रभावी रूप से शामिल कर विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक ज्ञान प्रदान कर सकें।कार्यशाला में उपस्थित सभी शिक्षकों ने वर्चुअल लैब की कार्यप्रणाली एवं उपयोगिता के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम से प्रयोगात्मक शिक्षा प्रदान करने के विभिन्न तरीकों को समझा। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने वर्चुअल लैब के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रयोगों के संचालन एवं उपलब्ध डिजिटल संसाधनों के उपयोग का व्यावहारिक अभ्यास भी किया।कार्यशाला के अंत में विकास कुमार त्यागी प्रवक्ता, साइंस विभाग ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागी शिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को वर्चुअल लैब की कार्यप्रणाली एवं उपयोगिता को समझने का अवसर मिला है। उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाले सभी लोगों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया तथा आशा व्यक्त की कि शिक्षक वर्चुअल लैब के माध्यम से विद्यार्थियों को अधिक प्रभावी एवं प्रयोगात्मक शिक्षा प्रदान करने में इस तकनीक का उपयोग करेंगे।

मानसून ऋतु-2026 के दौरान प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 8% अधिक वर्षा के बावजूद प्रदेश के 37 जिलों में औसत से कम वर्षा
लखनऊ/मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। मानसून ऋतु (01 जून – 30 सितम्बर) 2026 के दौरान उत्तरोत्तर प्रबल होती एल-नीनो परिस्थितियों के दृष्टिगत मानसून ऋतु के प्रथम चरण (जून-जुलाई) के दौरान प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा के बावजूद मानसून ऋतु के द्वितीय चरण (अगस्त-सितम्बर) के दौरान तटस्थ धनात्मक हिन्द महासागरीय द्विध्रुव एवं हिन्द महासागर में बने कुल 10






