शुकतीर्थ/मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। शुकतीर्थ में आयोजित श्रीरामकथा में मानस मर्मज्ञ मोरारी बापू ने राजा परीक्षित के सात दिवसीय आध्यात्मिक अनुभवों का क्रमबद्ध वर्णन करते हुए बताया कि सच्चे श्रवण और श्रद्धा से मनुष्य सीमित समय और सीमित साधनों में भी परम सत्य की प्राप्ति कर सकता है।सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अनुसार पहले दिन परीक्षित को गुरुदर्शन का लाभ मिला, जो आत्मकल्याण की पहली सीढ़ी है। दूसरे दिन उन्होंने जाना कि केवल श्रवण भी मनुष्य को भवसागर से पार करा सकता है। तीसरे दिन सेवाधर्म का बोध हुआ, जिसे बापू ने सबसे कठिन साधना बताया। चौथे दिन कथा श्रवण से इंद्रियों में संयम स्वतः प्रकट हुआ। पांचवें दिन अहिंसा का भाव जागृत हुआ, जबकि छठे दिन भक्तिभाव के कारण उनकी आंखों से अश्रुधारा बह निकली। सातवें दिन उन्होंने “परम सत्यम् धीमहि” के साथ परम सत्य की प्राप्ति का अनुभव किया।
शुकतीर्थ में श्रीराम कथा के पांचवें दिन बापू ने कहा कि व्यक्ति अपने नैसर्गिक गुणों को सहजता से नहीं छोड़ता। उन्होंने स्पष्ट किया कि सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण मनुष्य को बांधे रखते हैं, और केवल बाह्य प्रयासों से परिवर्तन संभव नहीं, जब तक भीतर से जागृति न हो।वाणी की पवित्रता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जिस जीभ ने अन्याय का अन्न न खाया हो, निंदा न की हो और जो निरंतर हरि स्मरण में लगी हो, उसकी वाणी में अद्भुत प्रभाव होता है। ऐसी वाणी जब किसी का स्मरण करती है, तो वह चेतना स्वतः प्रकट होती है।बापू ने भक्ति के संदर्भ में श्रवण को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि सुनना ही साधना का सबसे सरल माध्यम है। उन्होंने विभीषण का उदाहरण देते हुए बताया कि श्रवण के माध्यम से ही उन्होंने भगवान की शरण प्राप्त की।उन्होंने कहा कि धन का दान करना सरल है, लेकिन सच्चा सेवाभाव अपनाना अत्यंत कठिन है। कथा श्रवण से जीवन में संयम स्वतः उत्पन्न होता है, क्योंकि कथा अमृत के समान है।बापू ने कहा कि धर्म और विज्ञान परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। विनोबा भावे के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “विज्ञान गति देता है, जबकि अध्यात्म दिशा प्रदान करता है।” उन्होंने चेताया कि गलत हाथों में विज्ञान विनाशकारी हो सकता है, इसलिए उसे धर्म के साथ संतुलित करना आवश्यक है।

बापू ने मनोविज्ञान को सरल उदाहरण से समझाते हुए कहा कि मन को जबरन रोकने पर वह उसी दिशा में भागता है। इसलिए उसे दबाने के बजाय रामनाम में लगाना चाहिए।कथा में भगवान भगवान राम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों—रामजन्म, नामकरण, यज्ञोपवीत, शिक्षा-दीक्षा, विश्वामित्र के साथ वनगमन, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और जनकपुर के धनुषयज्ञ—का सजीव चित्रण किया गया।मोरारी बापू के मुख से श्रीराम चरित्र का वर्णन सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए और बापू के भजनों पर भक्तिभाव से झूमने लगे।

मुजफ्फरनगर के पर्यटन विकास हेतु 07 परियोजनाओं के लिए 788 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत
लखनऊ (रिपोर्टर)। पर्यटन विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा राज्य योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में सहारनपुर मण्डल के अधीन आने वाले जनपद मुजफ्फरनगर की विधान सभाओं पर्यटन विकास के लिए 788 लाख रूपये की 07 परियोजनायें स्वीकृत की गयी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्राचीन धरोहरों का कायाकल्प तथा अवस्थापना सुविधायें सृजित करना है। इन






