
बता दें, देश की आजादी के बाद वर्ष 1948 में स्थापित शिवचौक करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, जहां कांवड़ यात्रा के दौरान विशाल कांवड़ें और भारी श्रद्धालु इसकी परिक्रमा करने के साथ आगे बढ़ते हैं। वहीं प्रतिदिन यहां आकर शिव मूर्ति व शिवलिंग पर जल भी चढ़ाते हैं और मन्नतें मांगते हैं। पूरे सावन भर भगवान शिव की पूजा आराधना का महत्व है। भगवान शिव की रोज पूजा करने से पुण्य फल प्राप्त होता हैं। भगवान शिव के रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। शिवचौक पर महादेव मंदिर की स्थापना वर्ष 1956 में नगर पालिका ने कराई थी। मंदिर की मान्यता बढ़ने के साथ इसकी कार्यकारिणी गठित हुई। कार्यकारिणी ने वर्ष 1991 में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। मंदिर में सुबह-शाम आरती होती है।







