मुजफ्फरनगर। श्रीराम कथा महोत्सव के बीच सोमवार को 8वें दिन एसडी कॉलेज मार्किट मंदिर परिसर में कथा व्यास राष्टÑीय संत अरविंद जी महाराज की श्रीमुख से चल रही श्रीराम कथा में शबरी चरित्र, गंगा उतरने, चित्रकूट निवास एवं दशरथ परमधाम गमन कथा का विस्तार से वर्णन किया। भावपूर्ण एवं भक्ति से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न श्रीराम कथा में अरविन्द महाराज व उनके सुपुत्र अभिषेक जी ने शबरी चरित्र एवं जटायु, गिलहरी, कबंध जैसे अन्य अनन्य भक्तों की भक्ति को समर्पित प्रसंगों के माध्यम से भक्तों पर अमृतमयी ज्ञान वर्षा की। कथा पंडाल में इस बीच जय श्रीराम के जयघोष गूंजते रहे। मंच और पंडाल की दिव्यता, साज-सज्जा व व्यवस्था अद्वितीय रही।
व्यासपीठ से महाराज श्री ने विभिन्न प्रसंगों का चरित्र चित्रण करते हुए कहा कि भगवान श्री राम, मां जानकी एवं भाई लक्ष्मण के साथ जब वन में पहुंचते हैं तो वहां उनकी मुलाकात निषाद राज से होती है। निषादराज प्रभु से अपने घर चलने की बात कहते हैं लेकिन प्रभु कहते हैं कि पिता की आज्ञा कुछ और ही है। इसके बाद प्रभु वहीं जंगल में विश्राम करते हैं और लक्ष्मण प्रभु के सोने के बाद पहरा देने लगते हैं। प्रभु ने सुमंत्र को समझाकर वापस भेज दिया और खुद गंगा किनारे पहुंचे और केवट से गंगा पार जाने के लिए नाव मांगते है, लेकिन केवट नाव लेकर नहीं आता और कहता है कि प्रभु हमें आप का भेद मालूम है। केवट कहता है..मांगी नाव न केवट आना, कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना….यानि जिसके छूते पत्थर की शिला स्त्री बन गई, मेरी नाव तो काठ की है वह कहीं स्त्री बन गई, तो फिर मैं लुट जाऊंगा, मेरी रोजी रोटी खत्म हो जाएगी। हे प्रभु, यदि पार जाना चाहते हो तो मुझे चरण पखारने को दो। उन्होंने कहा कि केवट की इच्छा पूर्ण होने के बाद गंगा जी पार करके प्रभु प्रयाग पहुंचे और वहां स्नान पूजा करने के बाद भरद्वाज के आश्रम पहुंचे। रात्रि विश्राम करने के बाद चित्रकूट पहुंचे, जहां बाल्मिकी मुनि से मिले। उधर, पुत्र वियोग में राजा दशरथ का निधन हो गया। इन्हीं प्रसंगों के बीच महाराज श्री ने केवट के माध्यम से बुलेटिन का जिक्र करते हुए कहा कि महाराज उसमें मैंने आपका फोटो देखा था, जहां एक पत्थर महिला का रूप धारण करने के बाद अंर्तध्यान हो गया था, ऐसे में मैं बिना आपके पांव धोएं नाव पर गंगा पार नहीं करा पाऊंगा। श्रीराम कथा महोत्सव में मुख्य यजमान चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप, गौरव स्वरूप, आकाश कुमार, नीरज कुमार के अलावा योगेंद्र मित्तल रहे। वहीं प्रसाद व्यवस्था गर्ग स्वीट्स रोशन लाल गर्ग एवं अशोक गर्ग ने की। इस दौरान कथा में नगर एवं जिले की प्रमुख सामाजिक, धार्मिक व राजनीतिक हस्तियों की इस बीच गरिमामयी उपस्थिति रही। इस दौरान मुजफ्फरनगर बुलेटिन संपादक अंकुर दुआ, पूजा दुआ, रमेश सार्इं, पूर्व विधायक अशोक कंसल, पूर्व जिलाध्यक्ष विजय शुक्ला, ललित अग्रवाल (भारती एड.), उमेश गर्ग, प्रवीण गोयल, अशोक तायल, अनिल धमीजा, रमेश खुराना, अजय गुप्ता, पवन नागर, यश अग्रवाल, संजय भाटिया, पंकज गर्ग, नितिन मित्तल, मुकेश शर्मा, कुलदीप गुप्ता, नरेश बंसल, राजू गोयल, राजू (टैंट वाले), योगेश सिंघल, विजय तागरा, अनुराग गर्ग, श्याम जसूजा, सतप्रकाश मित्तल, रक्षित नामदेव, पवन छाबड़ा,नरेश पोपली, पूजा त्यागी आदि रहे। मंच संचालन अनिल नामदेव ने किया।

भारत की संस्कृति को खत्म करने का वैश्विक षड्यंत्र चिंता का कारण: शांतनु जी
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। श्री बालाजी जन्मोत्सव के बीच श्री बालाजी धाम मंदिर संकीर्तन भवन मे आयोजित श्री राम कथा के चौथे दिन आचार्य श्री शांतुनु जी महाराज ने विभिन्न प्रसंगो के साथ श्री राम-सीता विवाह प्रसंग सुनाया तो श्रद्वालु आनंदित होकर झूम उठे। इस मौके पर शांतुनु महाराज ने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली है कि






