बार संघ के 25 अधिवक्ताओं को हाईकोर्ट का नोटिस, हड़कंप

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मुजफ्फरनगर। जिला बार के 25 अधिवक्ताओं को हाईकोर्ट ने नोटिस देते हुए न्यायिक कार्यों में बाधा पहुंचाने के आरोप में जवाब तलब किया है, जिसमें बार संघ के अध्यक्ष और महासचिव सहित कई प्रमुख पदाधिकारियों के साथ अन्य अधिवक्ताओं के नाम शामिल हैं। हाईकोर्ट द्वारा बार-बार हड़ताल करने के मामले में नोटिस देने के साथ इसके लिए जिला जज के समक्ष जवाब दाखिल करने के लिए निर्देशित किया है। उधर, जिला बार संघ ने आरोपों को गलत बताते हुए जवाब दाखिल करने को 6 वरिष्ठ अधिवक्ताओं का पैनल गठित किया है।
हाईकोर्ट के नोटिस को लेकर कचहरी में भारी हलचल है। इस नोटिस प्को ा्रयागराज हाईकोर्ट की ओर से जिला बार संघ के 25 अधिवक्ताओं को जारी करते हुए हड़ताल कर न्यायिक कार्य को प्रभावित करने के आरोप लगाये गए हैं। इसके सहारे प्रयागराज हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर जनपद में न्यायिक कार्यों में बाधा डालने के मामले में कड़ा रूख अपनाते हुए बार संघ से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ने जिला बार संघ के अध्यक्ष ठा. कंवरपाल सिंह, महासचिव चौ. चंद्रवीर सिंह, उपाध्यक्ष निश्चल त्यागी, कोषाध्यक्ष शशि प्रभा सहित 25 पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर आरोपित किया है। बार संघ के सूत्रों के अनुसार इस नोटिस में कहा गया है कि बार-बार हड़ताल करते हुए न्यायिक कार्य को प्रभावित किया जा रहा है। इस नोटिस में हाईकोर्ट की ओर से 5 तारीखों पर जिला बार संघ द्वारा न्यायिक कार्यों से विरत रहने व हड़ताल के लिए भेजे प्रस्तावों का संज्ञान लिया है। इन्हीं प्रस्तावों पर जिला बार संघ पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। नोटिस में निर्देश दिए हैं कि आरोपों को लेकर सभी संबंधित अधिवक्ता 15 दिन के भीतर ही जवाब दाखिल करेंगे। नोटिस के साथ हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि किसी अदालत में न्यायिक कार्यों की हड़ताल नहीं होनी चाहिए, इससे न्यायिक प्रक्रिया में बाधा आती है और लोगों को समय पर न्याय देने की व्यवस्था और परिकल्पना पूर्ण नहीं हो पाती है।

इन्होंने कहा-
हाईकोर्ट के नोटिस को लेकर जिला बार संघ के महासचिव चंद्रवीर सिंह एड. ने बताया कि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की ओर से हड़ताल के प्रस्तावों को लेकर नोटिस जारी किया गया है। इसमें लगाए गए आरोप बेबुनियाद और गलत हैं। उन्होंने कहा कि नोटिस के सहारे उन पर लगाए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। उनके पदभार संभालने के बाद से न तो कोई हड़ताल हुई है और न ही अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से विरत रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के नोटिस का जवाब जिला जज की कोर्ट में दाखिल करना है, इसके लिए बार संघ ने 6 वरिष्ठ अधिवक्ताओं की एक कमेटी बनाई है, जो कोर्ट में जवाब पेश करने के लिए तैयारी कर रही है।

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