मुजफ्फरनगर। समाजवादी पार्टी को उस समय सोमवार को करारा झटका लगा, जब पूर्व विधायक नूर सलीम राणा के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने सपा की साइकिल छोड़ कर राष्ट्रीय लोकदल का हैंडपंप का दामन थाम लिया। मेरठ रोड पर स्थित राणा हाउस में इस बीच संपन्न कार्यक्रम में पूर्व विधायक ने समर्थकों के साथ रालोद की सदस्यता पुरकाजी विधायक एवं योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार व रालोद जिला अध्यक्ष की मौजूदगी में रालोद की सदस्यता ग्रहण की।
बीते काफी समय से परेशानी से जुझ रहे राणा परिवार में एक बार फिर बदलाव की कवायद तेज हो गई है। सोमवार को मेरठ रोड स्थित राणा हाऊस में संपन्न कार्यक्रम में पूर्व विधायक नूर सलीम राणा के नेतृत्व में करीब 150 से 200 लोगों ने सपा को अलविदा कहते हुए रालोद की सदस्यता ग्रहण की। रालोद में शामिल होने वाले लोगों में आठ से दस ग्राम प्रधान भी शामिल थे, जो अपने साथ बड़ी संख्या में समर्थकों को लेकर यहां पहुंचे। कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने रालोद में शामिल होने वालों का इस बीच फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया। इस दौरान पूर्व विधायकों के समर्थकों में नेजाजी के निर्णय को सही ठहराया गया। कार्यक्रम में मौजूद कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने वक्फ संशोधन बिल को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा कि यह सरकार का एक अच्छा कदम है। पहले कुछ लोग वक्फ संपत्तियों पर मठाधीश बनकर बैठे थे, लेकिन अब इस बिल के पास होने से मुस्लिम समाज के गरीब लोगों को इसका सीधा फायदा होगा। मंत्री के इस बयान का रालोद में शामिल होने वाले कई लोगों ने समर्थन दिया।
बता दें, पूर्व विधायक नूर सलीम राणा पूर्व सांसद व सपा के कद्दावर नेता कादिर राणा के भाई हैं। नूर सलीम के नेतृत्व में एक साथ इतने लोगों का साथ छोड़ देना सपा के लिए एक बड़ी राजनीतिक क्षति माना जा रहा है। राणा का क्षेत्र में अच्छा-खासा प्रभाव रहा है। उनके इशारे पर इतनी बड़ी संख्या में लोगों का पाला बदलना सपा की जमीनी ताकत को कमजोर कर सकता है। वहीं, रालोद के लिए यह एक सुनहरा मौका है।







