मुजफ्फरनगर। राजकीय सम्प्रेक्षण गृह किशोर मुजफ्फरनगर में सिखों के 10वे गुरू गोविन्द सिंह के साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह व फतेह सिंह की शहादत को याद कर नमन किया। वीर बाल दिवस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में किशोरों को दृढ़ संकल्प के साथ सच्चाई के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
प्रबंधन समिति सदस्य डॉ. राजीव कुमार ने बंदीगृह में निरूद्ध किशोरों को छोटे साहिबजादे जोरावर सिंह व फतेह सिंह अपनी दादी मां माता गुजरी के साथ एक ओर चले गए तथा बड़े साहिबजादे-बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह पिता के साथ रह गए। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी सरसा नदी को पार कर चमकौर साहिब पहुंच गए, जहां महासंघर्ष शुरू हुआ, जिसमें चालीस सिखों को एक विशाल सेना का सामना करना पड़ा। इसी युद्ध में बड़े साहिबजादे अजीत सिंह व जुझार सिंह बहादुरी से लड़ते हुए मैदान-ए-जंग में शहादत प्राप्त कर गए। मात्र 7 व 9 वर्ष की आयु के साहिबजादों को वजीर खां ने उन्हें माता गुजरी जी के साथ ठंडे बुर्ज में बंद करने का आदेश दिया। 1705 में दोनों साहिबजादों को जिन्दा दीवार में चिनवा दिया गया। दोनों ने मृत्यु स्वीकार की लेकिन अपने धर्म पर अटल रहे। इतिहास में गुरु गोबिन्द सिंह जी के साहिबजादों की शहादत का कोई सानी नहीं है। साहिबजादों की इस अभूतपूर्व शहादत को नमन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 दिसम्बर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया, ताकि देश के बालक, बालिकाएं व युवा साहिबजादों के अदम्य साहस, बलिदान व अभूतपूर्व शहादत से परिचित हों और प्रेरित हों। वीर बाल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मोहित कुमार संस्था प्रभारी द्वारा किशोरों को साहिबजादों से प्रेरणा लेनी चाहिये। इस दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार के अलावा राजकीय सम्प्रेक्षण गृह किशोर में नामित शिक्षक राकेश कुमार, सैयद शारिक ने किशोरों को सकारात्मक सोच विकसित करने के लिये प्रेरित किया। उक्त आयोजन में प्रदीप कुमार, सुरजीत सिंह की बड़ी भूमिका रही।






