नपे नगर स्वास्थ्य अधिकारी, लगाया 40 हजार का जुर्माना

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मुजफ्फरनगर। एनजीटी द्वारा सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का संचालन न करने और प्रदूषण फैलाने को लेकर 68 लाख रुपये का जुर्माना नगर पालिका पर किये जाने का मामला शनिवार को भी चर्चाओं में रहा। मामले में समय से जवाब दाखिल न करने पर पालिका के नगर स्वास्थ्य अधिकारी पर 40 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया गया है। लखनऊ से आदेश आने के बाद डीएम ने सीएमओ व ईओ को तलब करते हुए नाराजगी जताई, जिसके बाद ईओ ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी के वेतन से जुर्माना राशि कटौती की संस्तुति करते हुए सीएमओ को पत्र भेजा है।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी से आर्बीट्रेशन में कंपनी द्वारा भुगतान के लिए किये गये दावों पर जवाब मांगा था, लेकिन समय से जवाब दाखिल नहीं करने पर आर्बीट्रेशन की ओर से डीएम को भेजे पत्र में कड़ी नाराजगी जताते हुए समय से जवाब दाखिल नहीं किये जाने और सुनवाई को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने पर पालिका के नगर स्वास्थ्य अधिकारी अतुल कुमार पर व्यक्तिगत तौर पर 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसे लेकर बीते दिवस डीएम उमेश मिश्रा ने सीएमओ डॉ. एमएस फौजदार और पालिका ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह को तलब करते हुए इस प्रकरण में लापरवाही बरतने पर नाराजगी जताई है। सीएमओ को उन्होंने जुर्माना राशि कटौती नगर स्वास्थ्य अधिकारी अतुल कुमार के वेतन से करने के निर्देश दिये हैं। बता दें कि नगर स्वास्थ्य अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने आर्बीट्रेशन में समय रहते जवाब दाखिल न होने की जानकारी न तो चेयरपर्सन को दी और न ईओ को बताया। इनकी जानकारी से छिपाकर पत्र भेज दिया, जिसमें जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। इसी पर नाराजगी के बाद यह कार्यवाही की गई है।
इन्होंने कहा-
ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि एटूजेड कंपनी की ओर से दर्ज शिकायत पर लखनऊ में चल रहे आर्बीट्रेशन में समय से पैरवी न होने पर स्वास्थ्य अधिकारी पर 40 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना किया है। उनका मूल पद चिकित्साधिकारी है और उनका वेतन निर्धारण व आहरण सीएमओ कार्यालय से होता है, इस कारण डीएम के निर्देश पर उनके वेतन से जुर्माना राशि के की कटौती उनके वर्तमान वेतन से करने की संस्तुति करते हुए सीएमओ को पत्र भेज दिया गया है।
उधर, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अतुल कुमार का कहना है कि उन्हें कार्यवाही की जानकारी नहीं है, न ही कोई पत्र मिला है। एटूजेड कंपनी को भुगतान का मामला उनके विभाग से न होकर सीधे लेखा विभाग से जुड़ा है। लेखाकार से जवाब दाखिल करने के लिए साल 2011 से 2018 तक एटूजेड कंपनी को पालिका के स्तर से किये भुगतान, कंपनी के प्रस्तुत बिलों की जानकारी और उसमें की कटौती सहित अन्य बिन्दुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी गयी थी, लेकिन लेखा विभाग ने जानकारी नहीं दी, जिस कारण जवाब दाखिल करने में देरी हुई।

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