नई दिल्ली/मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। क्राफ्ट पेपर की लगातार बढ़ती कीमतों और घटती आपूर्ति ने पेपर कोन उद्योग के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। पिछले दो महीनों में क्राफ्ट पेपर के दाम करीब 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जबकि दूसरी ओर पेपर की उपलब्धता लगातार कम होती जा रही है। इससे पेपर कोन निर्माताओं की उत्पादन लागत बढ़ गई है और कई इकाइयां बंदी के कगार पर पहुंच गई हैं।
देशभर के पेपर कोन निर्माताओं की बुधवार को नई दिल्ली के होटल हॉलिडे इन में महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में पेपर की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि, आपूर्ति में कमी और बढ़ती उत्पादन लागत के बावजूद पेपर कोन के दाम लागत के अनुरूप नहीं बढ़ने पर गंभीर चिंता जताई गई। निर्माताओं ने कहा कि “पेपर नहीं तो पेपर कोन कैसे बनेगा?” यदि पेपर की नियमित और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हुई तथा पेपर कोन के बिक्री मूल्य में लागत के अनुरूप सुधार नहीं किया गया तो छोटी और मध्यम इकाइयों के लिए उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।
निर्माताओं ने कहा कि क्राफ्ट पेपर केवल पेपर कोन उद्योग का ही प्रमुख कच्चा माल नहीं है, बल्कि कोरुगेटेड बॉक्स, पैकेजिंग तथा कई अन्य उद्योगों की पूरी सप्लाई चेन इसी पर निर्भर है। यदि पेपर की कमी और कीमतों में वृद्धि इसी प्रकार जारी रही तो इसका व्यापक असर पैकेजिंग उद्योग पर भी पड़ सकता है। बैठक में चिंता जताई गई कि पेपर की कमी के कारण आगे चलकर कोरुगेटेड बॉक्स और पैकेजिंग सामग्री की कीमतें बढ़ सकती हैं तथा उनकी उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर टेक्सटाइल, एफएमसीजी, ऑटोमोबाइल, कृषि एवं अन्य उत्पादों की पैकेजिंग और सप्लाई पर पड़ सकता है।

पेपर कोन निर्माताओं ने केंद्र सरकार से मांग की कि घरेलू उद्योग की जरूरत पूरी होने तक क्राफ्ट पेपर/पेपर के निर्यात पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि देश के छोटे एवं मध्यम उद्योगों को पर्याप्त कच्चा माल मिल सके और उत्पादन व्यवस्था सामान्य हो। निर्माताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो एक सप्ताह तक फैक्ट्रियां बंद रखने जैसे कठोर कदम पर विचार करना पड़ सकता है। उनका कहना था कि यह कदम किसी दबाव की राजनीति के लिए नहीं, बल्कि लगातार बढ़ती लागत और कच्चे माल की अनुपलब्धता के कारण मजबूरी में उठाना पड़ सकता है।
पेपर कोन उद्योग सीधे तौर पर टेक्सटाइल और स्पिनिंग मिलों की सप्लाई चेन से जुड़ा है। पेपर कोन की आपूर्ति प्रभावित होने पर धागा मिलों का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। इसके साथ ही रोजगार, टेक्सटाइल उत्पादन, पैकेजिंग उद्योग और सरकार के जीएसटी राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
बैठक की अध्यक्षता सुभाष चंद्र अग्रवाल ने की। संचालन अशोक छारिया एवं पवन शर्मा ने संयुक्त रूप से किया।
बैठक में हापुड़, भीलवाड़ा, इंदौर, अहमदाबाद, चंडीगढ़, डेराबस्सी, भटिंडा, भोपाल, उदयपुर, लुधियाना, बद्दी, मुजफ्फरनगर सहित उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात एवं अन्य राज्यों से आए प्रमुख पेपर कोन निर्माताओं ने भाग लिया। इनमें मुकेश गुप्ता, आदित्य राज मोदी, अशोक खंडेलवाल, मयूर पासवाला, कुलदीप गर्ग, उमेश शाह, सुधीर गुप्ता, पवन कुमार गोयल, के.के. अग्रवाल, जय कुमार सहित बड़ी संख्या में निर्माता उपस्थित रहे।

विकास राठी को मिली यूपी अंडर-23 क्रिकेट टीम में मैनेजर की जिम्मेदारी
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। मुजफ्फरनगर के लिए गौरव की बात है कि विकास राठी को उत्तर प्रदेश की अंडर-23 क्रिकेट टीम का मैनेजर नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति से स्थानीय क्रिकेट जगत में खुशी का माहौल है। विकास राठी मुज़फ्फरनगर क्रिकेट एसोसिएशन के संयुक्त सचिव भी हैँ। मुज़फ्फरनगर क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव मनोज पुंडीर ने बताया






