मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा एवं मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशन में तथा प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग अभिनव राज के मार्गदर्शन में समिति सदस्य डॉ राजीव कुमार द्वारा वन्य प्राणी सप्ताह के अंतर्गत क्विज प्रतियोगिता व कार्यशाला का आयोजन किया गया।
भारत में वन्यजीव सप्ताह प्रतिवर्ष 02 से 08 अक्टूबर तक मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना है। इसकी शुरुआत 1952 में भारतीय वन्यजीव बोर्ड द्वारा की गई थी, जिसके बाद से यह एक महत्वपूर्ण वार्षिक आयोजन बन गया है। प्राकृतिक आवासों को आपस में जोड़ना, वन्यजीवों के लिए सुरक्षित गलियारों को बनाए रखना और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है।
वन्यजीव संरक्षण भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न अंग रहा है, जिसे संवैधानिक प्रावधानों और विभिन्न कानूनों के माध्यम से भी मजबूत किया गया है। भारत में वन्यजीवों और उनके आवासों की सुरक्षा के लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 जैसे महत्वपूर्ण कानून लागू हैं।
वन्यजीवों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय उद्यान (National Parks), वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries) और बायोस्फीयर रिजर्व (Biosphere Reserves) जैसे संरक्षित क्षेत्र स्थापित किए गए हैं।
जलवायु परिवर्तन, आवासों का विनाश और अवैध शिकार (Poaching) वन्यजीवों के सामने प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
वन्यजीव संरक्षण का अर्थ है पृथ्वी पर मौजूद विभिन्न प्रकार के पौधों और जानवरों की प्रजातियों और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना। यह पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रत्येक प्रजाति खाद्य श्रृंखला और पारिस्थितिकी तंत्र में एक विशिष्ट भूमिका निभाती है।
जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक है, और वन्यजीव इसका एक महत्वपूर्ण घटक हैं। यह पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं जैसे परागण, जल शुद्धिकरण और मिट्टी निर्माण में योगदान करती है।

कई वन्यजीव प्रजातियाँ औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं और चिकित्सा अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वन्यजीव पर्यटन और इको-टूरिज्म स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देते हैं और रोजगार के अवसर पैदा करते हैं। संरक्षण के प्रयास मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और संधियाँ जैसे CITES (लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन) भी वन्यजीव संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वन्यजीव सप्ताह के अंतर्गत सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल 15 (SDG 15) का मुख्य अर्थ “भूमि पर जीवन” (Life on Land) का संरक्षण और उसकी सुरक्षा करना है। वन्यजीव सप्ताह (2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर) का उद्देश्य लोगों में प्रकृति और जीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, और SDG 15 इस उद्देश्य को कानूनी व वैश्विक ढांचा प्रदान करता है।
वन्यजीव सप्ताह के संदर्भ में SDG 15 के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. वन्यजीवों और उनके आवासों की रक्षा (Protecting Wildlife & Habitats)
• अवैध शिकार पर रोक: SDG 15 का एक प्रमुख लक्ष्य लुप्तप्राय प्रजातियों (Endangered Species) के अवैध शिकार (Poaching) और उनके अंगों की अवैध तस्करी (Trafficking) को पूरी तरह समाप्त करना है।
• प्राकृतिक आवासों का संरक्षण: जानवरों के रहने के स्थानों (जंगलों, पहाड़ों और आर्द्रभूमि) को इंसानी अतिक्रमण से बचाना ताकि वन्यजीव सुरक्षित फल-फूल सकें।
2. जैव विविधता के नुकसान को रोकना (Halting Biodiversity Loss)
• पृथ्वी पर जीवों की विविधता (Biodiversity) को बनाए रखना पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के संतुलन के लिए जरूरी है।
• पेड़-पौधों और जानवरों की कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं; SDG 15 उनके संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाने पर जोर देता है।
3. वनों का सतत प्रबंधन (Sustainable Forest Management)
• वन दुनिया के 80% से अधिक थलीय जीवों का घर हैं।
• वन्यजीव सप्ताह के दौरान वनों की कटाई को रोकने (Deforestation), नए पेड़ लगाने (Afforestation) और जंगलों को मरुस्थल बनने से बचाने पर विशेष जोर दिया जाता है, जो SDG 15 का मूल मंत्र है। 4. मानव और प्रकृति में सह-अस्तित्व (Coexistence)
• यह लक्ष्य सिखाता है कि वन्यजीवों का संरक्षण केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि इंसानों के खुद के अस्तित्व और टिकाऊ आजीविका के लिए भी अनिवार्य है।
उक्त क्विज प्रतियोगिता में सफल प्रतिभागियों को डॉ राजीव कुमार द्वारा छवि, गरिमा,दिव्या, पायल, अनुष्का, नेहा, नीलू, स्वीटी, गौरी,आँचल आदि को उपहार भेंटकर सम्मानित किया गया। उक्त जन जागरूकता कार्यक्रम को सफल बनाने में मैपल्स ग्रुप ऑफ हायर एजुकेशन गर्ल्स कॉलेज, बुढाना की प्राचार्य डॉ मधु शर्मा एवं निदेशक डॉ दिव्या जैन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा ने घोषित किए आठ उम्मीदवार
लखनऊ (रिपोर्टर)। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव के लिए भाजपा ने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पाण्डेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को प्रत्याशी






