मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। जानसठ रोड स्थित आशीर्वाद वेंकट हॉल में शुक्रवार को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ धार्मिक वातावरण में हुआ। कथा के प्रथम दिन कथा व्यास आचार्य धर्मेंद्र उपाध्याय जी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा के महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि संसार के सभी जीव काल रूपी सर्प के मुख में हैं। मृत्यु निश्चित है, इसलिए मृत्यु आने से पहले मनुष्य को सत्कर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलते हुए अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मृत्यु से मुक्ति के लिए ही राजा परीक्षित को श्री शुकदेव जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया था। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से निकालकर परमात्मा की भक्ति की ओर ले जाती है। कथा के श्रवण मात्र से मनुष्य के अनेक कष्ट दूर होते हैं और उसके भीतर सद्विचार एवं आध्यात्मिक चेतना का जागरण होता है।

कथा व्यास ने भगवान श्रीराम के चरित्र का वर्णन करते हुए शूर्पणखा प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, संयम और धर्म का प्रतीक है। वनवास के दौरान शूर्पणखा भगवान श्रीराम के समक्ष विवाह का प्रस्ताव लेकर पहुंची, लेकिन प्रभु श्रीराम ने मर्यादा का पालन करते हुए उसे समझाया। इसके बाद शूर्पणखा ने माता सीता के प्रति दुर्भावना प्रकट की, जिसके परिणामस्वरूप लक्ष्मण जी ने उसके नाक-कान काट दिए। इस प्रसंग के माध्यम से आचार्य जी ने कहा कि मनुष्य को काम, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे विकारों से बचकर धर्म एवं संयम के मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि श्रीमद्भागवत कथा को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि इसके संदेश को अपने जीवन में उतारें। भगवान का स्मरण, सत्कर्म, सेवा और सदाचार ही मनुष्य के जीवन को सफल बनाते हैं। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भजनों एवं धार्मिक प्रसंगों पर वातावरण भक्तिमय हो गया।

सक्षम की बैठक में किया प्रांत प्रशिक्षण वर्ग और नेत्र कुंभ को सफल बनाने का आह्वान
हरिद्वार (रिपोर्टर)। समदृष्टि, क्षमता विकास एवं अनुसंधान मंडल (सक्षम) की जिला इकाई की बैठक शुक्रवार को गंभीर मार्ग स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला कार्यालय पर संपन्न हुई। बैठक में रविवार से शुरू हो रहे प्रांत प्रशिक्षण वर्ग और अर्द्ध कुंभ के दौरान आयोजित किए जाने वाले नेत्र कुंभ को सफल बनाने का आह्वान किया






