मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। देश के बड़े उद्योग घरानों के दिवालिया होते ही सबसे पहली मार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों पर पड़ती है। करोड़ों का माल भेजने के बाद भुगतान फंस जाता है, ऊपर से सरकार को वस्तु एवं सेवा कर पहले ही जमा करना पड़ता है। इसी दोहरी मार से सूक्ष्म उद्योग क्षेत्र को बचाने के लिए इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) ने केंद्र सरकार के समक्ष मोर्चा खोला है।
आईआईए मुजफ्फरनगर चैप्टर के चेयरमैन अमित जैन की ओर से माननीय वित्त मंत्री, भारत सरकार को भेजे गए पत्र में दिवाला और दिवालियापन संहिता / राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण कानून में सूक्ष्म उद्योगों के हित में आमूलचूल बदलाव की मांग की गई है।
अमित जैन, चेयरमैन, आईआईए मुजफ्फरनगर ने कहा – _”सूक्ष्म-लघु उद्योग के लिए उसका बकाया केवल एक बिल नहीं है, वह उसकी कार्यशील पूंजी, उसके मजदूरों की रोजी-रोटी और उसके अस्तित्व का सवाल है। आज दिवाला संहिता में सूक्ष्म लघु उद्योग को सामान्य लेनदार मानकर कतार में सबसे पीछे खड़ा कर दिया जाता है, यह न्याय नहीं है। सरकार को कर्मकार देय की तरह ही सूक्ष्म लघु उद्योग के देय को भी विशेष सुरक्षा देनी होगी।”
आईआईए कार्यालय पर आयोजित मंथन बैठक में पवन कुमार गोयल, मंडल चेयरमैन, आईआईए सहारनपुर डिवीज़न ने कहा – _”हम माल बेचते हैं, वस्तु एवं सेवा कर सरकार को भरते हैं और जब खरीदार दिवालिया होता है तो पैसा भी डूबता है और भरा हुआ सेल्स कर भी नहीं मिलता। यह दोहरा अन्याय है। यदि सरकार सच में सूक्ष्म लघु उद्योग को बचाना चाहती है तो दिवाला कानून और कर कानून में समन्वय बनाकर न्यूनतम सुरक्षित भुगतान की गारंटी देनी होगी।
*आईआईए की 6 सूत्रीय मांग:*
*1. विशेष प्राथमिकता -* अति सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के बकाये को कर्मकार देय की तरह दिवाला संहिता में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
*2. न्यूनतम भुगतान की गारंटी -* समाधान योजना या परिसमापन की राशि में से अति सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए न्यूनतम सुरक्षित भुगतान तय हो।
*3. प्रतिनिधि की नियुक्ति -* अधिकरण में अति सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों की आवाज उठाने के लिए अधिकृत प्रतिनिधि / सुविधादाता नियुक्त हो।
*4. कानूनों में समन्वय -* सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम 2006 के भुगतान सुरक्षा अधिकारों को दिवाला संहिता में मान्यता मिले।
*5. कर न्याय -* जिस माल का भुगतान नहीं मिला और खरीदार दिवालिया हो गया, उस पर भरे गए वस्तु एवं सेवा कर की वापसी / समायोजन की व्यवस्था हो।
*6. पूरी पारदर्शिता -* समाधान पेशेवर द्वारा अति सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के दावों को समय पर निपटाना और समाधान योजना में उन्हें कितना मिलेगा, इसका खुलासा अनिवार्य हो।
यह मांग पत्र प्रधानमंत्री, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, कंपनी कार्य मंत्रालय, दिवाला और दिवालियापन बोर्ड, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम को भी भेजा गया है।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) ने कहा है कि यदि इस पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो देश भर के सूक्ष्म लघु उद्यमियों को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
इस मंथन बैठक में सहारनपुर मंडल के चेयरमैन पवन कुमार गोयल, पूर्व चेयरमैन विपुल भटनागर, मनोज अरोरा, सचिव राहुल मित्तल, कोषाध्यक्ष सुधीर अग्रवाल, युवा विंग कैप्टेन अनमोल अग्रवाल, अमित गर्ग, राज शाह, प्रेरक जैन, नमन जैन, प्राचीर अरोरा, उमेश गोयल, अर्णव अग्रवाल, एडवोकेट तुषार गुप्ता, आदि उपस्थित रहे।

देश में मोटे अनाज का बढ़ रहा महत्व, श्रीराम कॉलेज में मिलेट्स जागरूकता कार्यक्रम
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। श्रीराम कॉलेज मुज़फ्फरनगर द्वारा उत्तर प्रदेश मिलेट्स ’श्री अन्न” पुनरुद्धार योजना के अंतर्गत कृषि विभाग उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से एक दिवसीय मिलेट्स जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों द्वारा मोटे अनाजों अर्थात मिलेट्स से निर्मित स्वादिष्ट खाद्य उत्पाद और उन्हें “सुपरफूड फॉर हेल्दी फ्यूचर” की






