हरिद्वार (रिपोर्टर)। तीर्थनगरी हरिद्वार स्थित श्री अवधूत मंडल आश्रम बाबा हीरादास जी हनुमान मंदिर, सिंहद्वार में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। महोत्सव में महामंडलेश्वर, संत-महात्माओं एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर गुरु परंपरा का सम्मान किया तथा गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुंदरकांड पाठ, भजन-कीर्तन एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्री सद्गुरु देव के पंचामृत अभिषेक एवं विशेष पूजन-अर्चन से हुआ। संत-महात्माओं ने अपने प्रवचनों में गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर जीवन को ज्ञान और सत्य के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।
आश्रम के प्रमुख अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. संतोषानंद देव महाराज ने कहा कि गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का अत्यंत पवित्र पर्व है। गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि व्यक्ति के जीवन का निर्माण कर उसे धर्म, सेवा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देते हैं। गुरु के बताए आदर्शों को अपनाकर ही व्यक्ति अपने जीवन को सफल और समाज को संस्कारित बना सकता है।
उन्होंने कहा कि आश्रम में आयोजित ऐसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम समाज में सद्भाव, संस्कार और सेवा की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से गुरु परंपरा का सम्मान करते हुए अपने जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में दूर-दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। दोपहर में आयोजित विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आश्रम परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में नमन कर सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम के समापन पर महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. संतोषानंद देव महाराज ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं, सेवकों एवं दानदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए सभी के मंगलमय जीवन की कामना की।

भागवन्ती सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई विश्वकर्मा जयंती
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। भागवन्ती सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, नई मंडी, मुजफ्फरनगर के प्रार्थना सभा स्थल पर श्री विश्वकर्मा जयंती श्रद्धा, उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में भगवान विश्वकर्मा के दिव्य व्यक्तित्व, सृजनशीलता, शिल्प-कौशल एवं कर्मयोगी जीवन से विद्यार्थियों को परिचित कराया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में आचार्या पूर्णिमा






