मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक में शनिवार को वहलना चौक का नाम बदलकर “महाराणा प्रताप चौक” किए जाने की जोरदार तरीके से मांग उठाई गई। सदन में वार्ड सभासद अमित पटपटिया की ओर से सदन में रखें गए इस प्रस्ताव पर चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप समेत अन्य सभासदों ने भी सहमति जताई। इस प्रस्ताव पर चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप और अधिशासी अधिकारी पवन कुमार ने अगली बैठक में प्रस्ताव पारित किए के साथ ही इससे जुड़े अन्य औपचारिकताओं को समय रहते पूर्ण करने का भी सदन को आश्वासन दिया। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर शनिवार को दिनभर बोर्ड बैठक में स्वीकृत किए जाने की चर्चा रही, जबकि इस प्रस्ताव पर स्वीकृति की मोहर लगाई जाएगी।
उधर, प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने पालिका चेयरपर्सन एवं समस्त बोर्ड सदस्यों का हार्दिक धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया है।मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के अद्वितीय योद्धा, अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान के अमर प्रतीक हैं। उनके नाम पर शहर के प्रमुख चौक का नामकरण नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, आत्मसम्मान एवं भारतीय संस्कृति के गौरव की भावना को और अधिक सशक्त करेगा। उन्होंने कहा कि इस विषय को लेकर वे निरंतर प्रयासरत रहे हैं। पूर्व में भी उन्होंने जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर को पत्र लिखकर राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर मेरठ की ओर से शहर में प्रवेश स्थल महाराणा प्रताप जी की भव्य प्रतिमा स्थापित की कार्यवाही कर शासन को प्रस्ताव भेजने का अनुरोध किया था। उनका उद्देश्य केवल चौक का नामकरण ही नहीं, बल्कि उस स्थान को महाराणा प्रताप के शौर्य, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का प्रेरणास्थल बनाना है। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि नगर पालिका बोर्ड द्वारा पारित यह प्रस्ताव शीघ्र ही मूर्त रूप लेगा और “महाराणा प्रताप चौक” आने वाले समय में मुजफ्फरनगर की पहचान तथा राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान का एक प्रमुख प्रतीक बनेगा।

रालोद दफ्तर की बदहाली पर कार्यकर्ताओं में आक्रोश, जयंत चौधरी तक पहुंचेगा मामला
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के सर्कुलर रोड स्थित जिला कार्यालय की बदहाली अब पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा और नाराजगी का विषय बनती जा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिस कार्यालय से पार्टी की गतिविधियों, बैठकों और संगठनात्मक कार्यक्रमों का संचालन होता है, वहां बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है।





