हरिद्वार (रिपोर्टर)। श्री तपोनिधि पंचायती अखाड़ा निरंजनी मायापुर, हरिद्वार के अंतर्राष्ट्रीय संत स्वामी रामभजन वन महाराज बताते हैं कि धार्मिक मान्यता के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का अवतरण हुआ था। इसी दिन से सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत भी हुई थी। अक्षय तृतीया के दिन शुभ काम करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया के दिन ही धन के देवता कुबेर ने महादेव की तपस्या की थी। भगवन शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें देवताओं का कोषाध्यक्ष बना दिया। इसलिए अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना गया है। इनमें शुभ कार्य करने के लिए पंचांग या किसी मुहूर्त को देखने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। हर साल वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया मनाई जाती है। इस बार तृतीया तिथि 19 और 20 अप्रैल दोनों दिन लग रही है। उदया तिथि के अनुसार 20 अप्रैल को पूरे दिन तृतीया तिथि मान्य रहेगी। पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि 19 अप्रैल, रविवार के दिन सुबह 10 बजकर 50 मिनट तक व्याप्त रहेगी। इसके उपरांत तृतीया तिथि आरंभ हो जाएगी। 20 अप्रैल, सोमवार के दिन सुबह 7 बजकर 20 मिनट तक तृतीया तिथि रहेगी। उदया तिथि की गणना के अनुसार, 20 तारीख को पूरे दिन तृतीया तिथि मान्य रहेगी लेकिन फिर भी अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल, रविवार को मनाना ही शास्त्र सम्मत रहेगा।

पीड़ित परिवार से मिला संयुक्त वैश्य अग्रवाल महासभा का प्रतिनिधिमंडल
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। जन्माष्टमी के दिन छपार क्षेत्र के गांव में राधा की वेशभूषा में सजी बालिका के साथ हुई घटना के बाद संयुक्त वैश्य अग्रवाल महासभा, जनपद मुजफ्फरनगर का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने गांव पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने परिवार से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। महासभा के






