मुजफ्फरनगर। नगरीय क्षेत्रों में विकास कार्यों व जनसुविधाओं की प्रगति को परखने की खातिर सोमवार को निकाय के प्रभारी अधिकारी एडीएम प्रशासन नरेन्द्र बहादुर सिंह ने अपने कार्यालय में निकायों के अधिशासी अधिकारियों के साथ समीक्षात्मक बैठक की। इस बीच उन्होंने शासन की योजनाओं के साथ साफ-सफाई और स्वच्छता सर्वेक्षण के कार्य के साथ यह जाना कि कूड़ा प्रबंधन के लिए आरआरसी और एमआरएफ सेंटर का संचालन आखिर अभी तक क्यों नहीं किया गया और कितने सेंटर का निर्माण कराया गया है।
सोमवार को एडीएम प्रशासन नरेन्द्र बहादुर सिंह की अध्यक्षता में जनपद के समस्त नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों के ईओ की समीक्षा बैठक कचहरी स्थित उनके कार्यालय में किया गया। बैठक में उन्होंने नगरीय निकायों द्वारा उपलब्ध करायी जाने वाली व्यवस्थाओं और सुविधाओं के बारे में विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए संबंधित को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। एडीएम प्रशासन ने बैठक में सभी निकायों से उनके यहां संचालित हो रहे नए व पुराने वाहनों की जानकारी मांगते हुए इसका डाटा बेस बना, उपलब्ध कराने एवं कंडम वाहनों को अपने बेड़े से बाहर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की विशेष प्राथमिकता में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से निकलने वाले उक्त कूडेÞ- करकट का तकनीकी निस्तारण करने के लिए रिसोर्स रिकवरी सेंटर बनाये जाने थे, लेकिन अभी तक कई स्थानों पर यह नहीं बने हैं और अधिकांश स्तर पर इनका संचालन नहीं किया गया है। यहां पर कचरा इकट्ठा करने और ठोस अपशिष्टों को अलग करना होता है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान के तहत अब तक कितने आरआरसी सेंटर बनाए हैं इस संबंध में जानकारी प्राप्त कर प्रक्रिया को सुचारू रूप से कार्य के लिए निर्देशित किया। इसके साथ ही उन्होंने एमआरएफ सेंटर का जिले में अभी तक कहीं भी संचालन नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए ईओ से रिपोर्ट मांगी। शहर में भी अभी तक एमआरएफ सेंटर चालू नहीं होने पर कारण भी जाना।

नगरपालिका परिषद ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि शहरी क्षेत्र में तीन एमआरएफ सेंटर का निर्माण होने के साथ एक सेंटर में मशीनरी सेक्शन भी तैयार करा लिया है, जिसे जल्द प्रारम्भ करा लिया जायेगा। उन्होंने बताया कि बढ़ती शीत लहर के दृष्टिगत क्षेत्र में गौवंशों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गौशालाओं में गौवंशों हेतु उनकी मूलभूत सुविधाओं को सुचारू रखने एवं सर्दी के मौसम में तिरपाल एवं सूखी पत्ती डालने पर जोर दिया है। वहीं रैन बसैरों मेंं बिजली पानी, साफ-सफाई व बैड चादर व अन्य व्यवस्थाओं के साथ चिन्हित किए स्थानों पर नियमित रूप से अलाव जलवाने पर जोर दिया गया।






