मुजफ्फरनगर। अन्नदाता की आय बढ़ाने के साथ बेहतर पैदावार के लिए अब डीएपी के स्थान पर एनपीके उर्वरक का इस्तेमाल कर सकते हैं। एनपीके के इस्तेमाल से खेतों में पैदावार की बढ़ोतरी भी होगी। जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया ने दावा किया कि जनपद में उर्वरक की कोई कमी नहीं है। यहां किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है।
जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया ने बताया कि जनपद में वर्तमान में यूरिया 16500 मैट्रिक टन, डीएपी 1525 मैट्रिक टन और एनपीके 3890 मैट्रिक टन उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि बेहतर पैदावार के लिए एनपीके उर्वरक में 12 फीसदी नाइट्रोजन, 32 फीसदी फास्फोरस और 16 फीसदी पोटाश की मात्रा मौजूद है, जो उपज को बढ़ाने के साथ ही आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि गेहूं व मक्का की बुवाई में डीएपी के स्थान पर एनपीके खाद का प्रति हेक्टेयर 188 किग्रा प्रयोग आसानी से किया जा सकता है, जबकि दलहन की बुवाई में 130 किग्रा प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि डीएपी जितना बेहतर उपज जितना कारगर है उतना एनपीके उर्वरक भी कारगर है। इसमें 16 फीसदी फास्फेट, 12 फीसदी सल्फर एवं 19 फीसदी कैल्शियम पाया जाता है। उन्होंने बताया कि गेहूं, चने व मटर बुवाई में डीएपी 130 किग्रा प्रति हेक्टेयर के स्थान पर सिंगल सुपर फास्फेट 375 किग्रा प्रति हेक्टेयर में प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने किसानों को डीएपी के स्थान पर एनपीके उर्वरक का प्रयोग करने का इस बार सुझाव दिया है।
उधर, जनपद में उवर्रक की किल्लत की चर्चाओं के बीच कृषि विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि जनपद के किसानों को उर्वरक की कोई कमी नहीं लगने दी जाएगी। इस माह में 4355 मैट्रिक टन यूरिया, डीएपी 2850 मैट्रिक टन, एनपीके 1350 मैट्रिक टन, एमओपी 1105. मैट्रिक टन आना प्रस्तावित है। वहीं बीते माह भी उर्वरक की कोई कमी नहीं रही है। इस माह में 52118 मैट्रिक टन यूरिया का वितरण हुआ है। वहीं 11490 मैट्रिक टन डीएपी और 3007 मैट्रिक टन एनपीके का वितरण हुआ। इसके अलावा 1054 मैट्रिक टन एमओपी और 4586 मैट्रिक टन एसएसपी का वितरण किया गया है।






