मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक बालियान ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा ने अवैध घुसपैठ, डेमोग्राफी में बदलाव, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर आक्रामक हिंदुत्व की नीति से विजय प्राप्त की है। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में 4 मई, 2026 एक ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज हुआ है, जब आजादी के बाद पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य में अपनी सरकार बनाने की दहलीज पर पहुंची है। पश्चिम बंगाल में इस बार तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ हिंदू वोटों का भारी ध्रुवीकरण हुआ है, जिसका सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिला। पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठ और बदलती डेमोग्राफी को लेकर हिंदू मतदाताओं के बीच चिंताएं बढ़ी हैं। अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं की रक्षा को लेकर बंगाली हिंदुओं में बढ़ती सजगता ने हिंदुत्व के नैरेटिव को बल दिया है ।देश के प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह व उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अनेकों मीटिंग ने हिंदू मतदाताओं को भरोसा दिलाया था कि बीजेपी के सत्ता में आने पर बंगाल का बेहतर विकास होगा व कानून व्यवस्था अच्छी होगी।
बंगाल में ममता सरकार अवैध घुसपैठियों (जैसे रोहिंग्या और बांग्लादेशी) को संरक्षण देकर उन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती रही है। ममता सरकार ने वर्ष 2017 में विजयदशमी के दिन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन पर रोक लगा दी थी, क्योंकि उसी दिन मुहर्रम था। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस आदेश को ‘मनमाना’ बताते हुए रद्द कर दिया था और कहा था कि सरकार एक समुदाय की भावनाओं को खुश करने के लिए दूसरे के अधिकारों में कटौती नहीं कर सकती। ममता सरकार के दौरान मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे सीमावर्ती जिलों में हिंदुओं के अल्पसंख्यक होने और जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Shift) की खबरें आती रही हैं। बंगाल में इस्लाम्मी शासन के दौरान हिंदुओं के प्रति क्रूरता और जबरन धर्म परिवर्तन किया गया था। इस्लाम्मी शासनकाल में हिंदुओं को इतना गरीब रखने की नीति अपनाई गई थी, ताकि वे विद्रोह करने की स्थिति में न रहें और इस्लाम की श्रेष्ठता स्वीकार करें। Legacy Of Muslim Rule In India by K. S. Lal 1992 के अनुसार यदि भारत में उस समय फ्रांस और स्पेन जैसे देशों जैसा निर्णय किया होता कि इन विदेशी इस्लामी शासकों को हमेशा के लिए खदेड़ दिया जाता, तो यहाँ के लोग इस्लाम को पूरी तरह से भूल चुके होते। मुस्लिम इतिहासकार अल-बिलादुरी लिखते है कि खलीफा हिशाम के समय में, भारतीय राजाओं ने अपने क्षेत्रों पर पुनः अधिकार कर लिया था और मुस्लिम बने लोग वापस हिंदू बन गए थे। इन वृत्तांतों से सिद्ध होता है कि भारतीय समाज ने कभी भी थोपे गए धर्म को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया और अवसर मिलते ही बलपूर्वक इस्लाम स्वीकार करने वाले मुस्लिमों ने अपनी जड़ों की ओर लौटने का प्रयास भी किया था।
इस चुनाव में हिंदू समुदाय के एक बड़े वर्ग में यह भावना प्रबल हुई है कि राजनीतिक तुष्टिकरण और जनसांख्यिकीय बदलाव उनके भविष्य के लिए खतरा बन सकते हैं। उत्तर बंगाल और बांग्लादेश की सीमा से सटे जिलों में घुसपैठ और बदलती जनसांख्यिकी के कारण स्थानीय हिंदुओं में ‘हाशिए पर जाने’ का डर सबसे ज्यादा देखा गया, जिसका सीधा असर मतदान केंद्रों पर दिखाई दिया। ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने एक चुनावी रैली में कहा था कि “अगर गृह मंत्री अमित शाह में हिम्मत है, तो 4 मई को मतगणना के दिन दोपहर 12 बजे जे बाद कोलकाता में रहकर दिखाए, फिर हम देखेंगे।टीएमसी के नेता उत्तरप्रदेश के आईपीएस अधिकारी अजयपाल शर्मा, जो चुनाव आयोग के आदेश पर अपनी ड्यूटी कर रहे थे व कानून व्यवस्था बना रहे थे,उनको चुनाव के बाद उत्तरप्रदेश से घसीटकर बंगाल लाकर हिसाब करने की बात कर रहे थे। टीएमसी अब सत्ता से जा रहो है और सत्ता जाने के बाद अब कानून और व्यवस्था का नियंत्रण नई सरकार (बीजेपी) के पास होगा।

आरक्षी निर्देश शाह के पिता के निधन पर पुलिस विभाग में शोक की लहर
हरिद्वार (रिपोर्टर)। रोशनाबाद पुलिस कार्यालय में तैनात आरक्षी निर्देश शाह के पिता इंद्रमोहन शाह का सोमवार को निधन हो गया। उनके निधन से पुलिस और वन विभाग में शोक की लहर है। वन विभाग में रेंजर पद से सेवानिवृत्त हुए 75 वर्षीय स्व.इंद्रमोहन शाह को स्वास्थ्य संबंध परेशानी के चलते जॉलीग्रांट हॉस्पिटल में भर्ती कराया






