मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। सनातन धर्म कॉलेज के माँ सरस्वती सभागार में भारतीय ज्ञान परम्परा समिति एवं एक्टिविटी क्लब के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परम्परा और विकसित भारत @2047 :ससमस्याएँ, चुनौतियाँ एवं समाधान” विषय पर संगोष्ठी (सेमिनार) का आयोजन प्राचार्य प्रो. सुधीर कुमार पुण्डीर के निर्देशन में किया गया जिसके मुख्य वक्ता भारतीय ज्ञान परम्परा समिति के समन्वयक डॉ. प्रमोद कुमार मिश्र रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती की मूर्ति पर पुष्पार्पण, वंदना एवं वन्देमातरम् के गायन से हुआ। संगोष्ठी का संचालन सह-समन्वयक डॉ. पीयूष शर्मा (जन्तु विज्ञान-विभाग) ने किया।

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. प्रमोद कुमार मिश्र ने भारतीय ज्ञान परम्परा की विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि अंग्रेजी राज से पूर्व तक भारतीय अर्थव्यवस्था का दुनिया की जीडीपी में 35 प्रतिशत से अधिक का योगदान था l यह उसके समावेशी विकास और सामूहिक प्रतिबद्धता के कारण था और यही समावेशी विकास और सामूहिक उत्तरदायित्व ही भविष्य के विकसित भारत की कुंजी है। मेगास्थनीज, फाह्यान, ह्वेनसांग, इत्सिंग आदि विदेशी यात्रियों ने अपने यात्रा विवरणों में भारतीय ज्ञान-विज्ञान और विकास का जो अद्भुत चित्र प्रस्तुत किया है उससे पता चलता है कि छठवीं-सातवीं शताब्दी तक भारत विश्वगुरु एवं सोने की चिड़िया था। इसी क्रम में डॉ. मिश्र ने विकसित भारत लक्ष्य 2047 के प्रमुख उद्देश्यों—विकसित राष्ट्र, आर्थिक विकास, प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि, समावेशी विकास; विकास के प्रमुख चार स्तम्भों—युवा, गरीब, महिलाएं और किसान; प्रमुख फोकस क्षेत्र—शिक्षा और कौशल, स्वास्थ्य सेवा, नवाचार एवं प्रोद्योगिकी, पर्यावरण स्थिरता, सुशासन एवं बुनियादी ढाँचा और रणनीतिक सुधारों की विस्तृत चर्चा की l भारतीय ज्ञान परम्परा समिति के सह-समन्वयक एवं कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ. पीयूष शर्मा ने विकसित भारत @2047 के लक्ष्य प्राप्ति में प्रगतिशील, गुणवत्तापूर्ण एवं भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित समावेशी शिक्षा प्रणाली की अनिवार्यता पर विशेष जोर दिया। इस अवसर पर प्रो. विजयलक्ष्मी, डॉ. चरण सिंह, डॉ. मदनपाल चौहान, डॉ. शुचि अग्रवाल एवं डॉ. सविता ने भी संगोष्ठी को सम्बोधित किया और विकसित भारत 2047 पर अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर प्रो. अरुणिमा रानी, डॉ. अंशुल शर्मा, डॉ. सविता, डॉ. संतोष यादव, डॉ. सुबोध कुमार, डॉ. अनूप पटेल, डॉ. (लेफ्टिनेंट) अजय सिवाच, डॉ. प्रतिभा, डॉ. खुशबू यादव, डॉ. नौशीन फातिमा अंसारी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोध छात्र एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

बीएचईएल में राजभाषा कार्यान्वयन संबंधी कार्यशाला का आयोजन
हरिद्वार (रिपोर्टर)। भारत सरकार की राजभाषा नीति के और अधिक प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की दृष्टि से बीएचईएल हरिद्वार में, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) के सदस्य संस्थानों के कर्मचारियों हेतु, एक कार्यशाला का आयोजन किया गया । मानव संसाधन विकास केन्द्र (एचआरडीसी) में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता, बीएचईएल हरिद्वार के महाप्रबंधक (मानव






