मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। मुजफ्फरनगर शहर की प्रमुख आवासीय कॉलोनियों में रहने वाले हजारों परिवार पिछले कई वर्षों से संपत्ति खरीद-बिक्री पर लगे प्रतिबंध के कारण गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट झेल रहे हैं। इस मुद्दे को उठाते हुए नगरपालिका परिषद की अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन सौंपकर राहत की मांग की है। इस मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंच से डीएम उमेश मिश्रा को बुलाकर उनसे रिपोर्ट मांगी और चेयरमैन मीनाक्षी स्वरूप को प्रकरण के साक्ष्यों सहित लखनऊ बुलाया है।
मुजफ्फरनगर में लगभग 570 बीघा भूमि से जुड़ा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। शहर की नई मंडी, गांधी कॉलोनी, द्वारिकापुरी, पटेलनगर, आदर्श कॉलोनी, साकेत, लाला दीपचंद कॉलोनी और शिवपुरी जैसी प्रमुख आवासीय कॉलोनियों को वर्ष 2019 में शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया गया था। इस निर्णय के बाद से इन क्षेत्रों में संपत्तियों के क्रय-विक्रय और बैंक ऋण पर पूरी तरह रोक लगी हुई है। नगरपालिका परिषद की अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने इस मामले को गंभीर जनहित का मुद्दा बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन सौंपा है। इसमें उन्होंने कहा कि लगभग सात वर्षों से जारी इस प्रतिबंध के कारण 20 हजार से अधिक परिवारों को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में बताया गया है कि इस भूमि का इतिहास काफी पुराना है। वर्ष 1942 में तत्कालीन नवाब शमशेर जंग सज्जाद अली द्वारा इस भूमि को लेकर एक समझौता किया गया था, जिसके बाद कई कानूनी विवाद सामने आए। वर्ष 1950 में न्यायालय के आदेश के बाद लाला दीपचंद को इस भूमि का वैध स्वामित्व प्राप्त हुआ। इसके बाद यहां विधिवत रूप से कॉलोनियों का विकास हुआ और समय-समय पर सरकारी अधिग्रहण भी हुआ, जिससे भूमि की वैधता प्रमाणित होती रही। इसके बावजूद वर्ष 2017 में प्रशासन द्वारा इस भूमि को शत्रु संपत्ति प्रतीत होने का नोटिस जारी किया गया। वर्ष 2019 में एक शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई और बिना ठोस निष्कर्ष के इन कॉलोनियों में संपत्ति के लेन-देन पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

इस प्रतिबंध का असर सिर्फ आवासीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि एसडी कॉलेज, ब्राह्मण कॉलेज और पुलिस लाइन जैसे महत्वपूर्ण संस्थान भी इससे प्रभावित हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे अपनी संपत्ति का उपयोग तक नहीं कर पा रहे हैं। विवाह, शिक्षा, चिकित्सा और आपात जरूरतों के लिए भी संपत्ति बेचने में असमर्थता बनी हुई है। भोपा रोड निवासी उद्यमियों आलोक स्वरूप और अनिल स्वरूप सहित कई लोगों ने दावा किया है कि उन्होंने दशकों पहले विधिवत बैनामों के आधार पर भूमि खरीदी थी और उनके पास न्यायालय तथा राजस्व विभाग से प्रमाणित दस्तावेज भी मौजूद हैं। नगरपालिका अध्यक्ष ने ज्ञापन में यह भी कहा कि शत्रु संपत्ति घोषित किए जाने का आधार केवल एक शिकायत है, जो तथ्यात्मक और कानूनी रूप से संदिग्ध प्रतीत होती है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
साथ ही, अंतिम निर्णय होने तक संपत्ति के क्रय-विक्रय पर लगे प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की गई है, ताकि निर्दाेष नागरिकों को राहत मिल सके। यह मुद्दा सीधे तौर पर हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा हुआ है, ऐसे में अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। नगरपालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने बताया कि उनके आग्रह को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से सुना और इस मामले में डीएम उमेश मिश्रा से रिपोर्ट भी मांगी है, साथ ही प्रकरण के सभी साक्ष्यों के साथ लखनऊ में बुलाया गया है। उम्मीद है कि यह मामला जल्द सुलझेगा और लोगों को राहत मिलेगी।

राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन में सौंपा डीएम को ज्ञापन
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। राष्ट्रीय हिन्दू शक्ति संगठन द्वारा जिलाधिकारी उमेश मिश्रा को संजय अरोड़ा राष्ट्रीय संयोजक के नेतृत्व में एक ज्ञापन सौंपा गया। उक्त ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने मुजफ्फरनगर में मोहर्रम के जलूस को लेकर व रुड़की रोड पर एक अवैध मजार को हटाने की मांग की। इस अवसर पर संजय अरोड़ा ने कहा






