गौ सेवा ही सुशासन का आधार है। निराश्रित गोवंश के संरक्षण में उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वश्रेष्ठ पहल

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मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ल एवं उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के सदस्य दीपक गोयल की अध्यक्षता में निराश्रित गोवंश संरक्षण कार्यो की सुरक्षा बैठक विकास भवन सभागार में बैठक आयोजित हुई । बैठक में उपाध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी एवं कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार ‘गो सेवा” को केवल सांस्कृतिक दायित्व नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार एक पवित्र एवं सतत कार्य के रूप में स्वीकार करते हुए सतत कार्य कर रही है। राज्य सरकार द्वारा निराश्रित एवं असहाय गोवंश के संरक्षण एवं वृहदायामी देखभाल के लिए व्यापक एवं बहु-आयामी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम प्रदेश भर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे है। उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जहाँ निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार द्वारा 50 रूपये प्रतिदिन की दर से भरण-पोषण की धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी गो-संरक्षण नीति के अन्तर्गत वर्तमान में राज्य के विभिन्न जनपदों में 7,700 से अधिक गो आश्रय स्थल सक्रिय रूप से संचालित हो रहे है। इन आश्रय स्थलों में 16 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आवास, नियमित आहार, स्वास्थ्य देखभाल तथा आवश्यक चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। यह व्यवस्था न केवल गोवंश संरक्षण को सुनिश्चित कर रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं सामाजिक संतुलन को भी सुदृढ़ कर रही है।

गौशालाओं के प्रभावी संचालन एवं पारदर्शिता करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा गौशालाओं में सी.सी.टी.वी. कैमरे स्याम्मित किए गये है। अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली 24X7 कार्यरत रहकर गोवंश की सुरक्षा, देखभाल की गुणवत्ता तथा प्रशासनिक जवाबदेही को सुदृढ़ कर रही है। मा० मुख्यमंत्री जी की निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के माध्यम से सरकार ने गो-संरक्षण को जन आन्दोलन का रूप प्रदान किया है। इस योजना के अन्तर्गत अब तक 1,87,065 गोवंश इच्छुक एवं जिम्मेदार गोपालकों को सुपुर्द किये गये है। सरकार कात अत्क गोवंश के लिये 50 रूपये प्रति दिन की दर से भरण-पोषण भत्ता सीधे गोपालकों के बैंक खाते में डी०बी०टी० के माध्यम से अंतरित किया जा रहा है। यह पहल न केवल गोवंश के संरक्षण में सहायक है, बल्कि गोपालकों की आय वृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
जनपद में जिला प्रशासन द्वारा गो संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में जनपद में कुल 23 गो आश्रय स्थल क्रियाशील है, जिनमें 6194 गोवंश का संरक्षण एवं पालन किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार उ०प्र० गोवध निवारण अधिनियम 1955 के अन्तर्गत गोवंश की सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। गो तस्करी जैसे गम्भीर अपराधों से सम्बन्धित नियमों के उल्लंघन पर त्वरित एवं कठोर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। कुछ असमाजिक एवं मिथ्य तथ्यों द्वारा भ्रम फैलाकर राज्य को बदनाम करने का प्रयास कर सकते है, परन्तु शासन ‘गो सेवा” के प्रति अपने अटूट निष्ठा एवं प्रतिबद्धता पर अटल है तथा कोई भी अनियमितता पाये जाने पर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। इस समय कतिपय तत्वों द्वारा भ्रामक सूचनाओं के प्रसार से जनमानस को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि निराश्रित गोवंश की सेवा एवं संरक्षण के लिये कोई कसर नहीं छोडी जायेगी। राज्य सरकार गोवंश के प्रति अपनी संवेदनशीलता, मानवीय एवं समर्पित दृष्टिकोण के साथ सुशासन के सिद्धान्तों को साकार करने के लिये निरन्तर प्रयासरत है। उन्होंने सभी संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए। गौशाला में क्षमता के अनुसार गौ वंशों को रखा जाए। नंदी, गर्भवती गाय, गाए के बच्चे को अलग अलग रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन गौशाला में वृक्ष नहीं लगे हैं,उन सभी गौ शालाओं में मां व गुरु के नाम से पेड़ लगाकर वृक्षारोपण किया जाए। गौशालाओं में भूसा भंडारण, हरे चारे, पीने के पानी, की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित रहें। उन्होंने कहा कि किसी गोवंश व नंदी से न बांधी जाए। कोई भी गोवंश सड़क पर घूमता हुआ ना दिखाई दे,उसको गौशाला में शिफ्ट कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिए कि सहभागिता योजना के अंतर्गत जिन गौवंश को दिया गया है, उनका मानदेय समय से दें तथा समय-समय पर निरीक्षण करते रहे। उन्होंने कहा कि गौवंश की मृत्यु हो जाती है तो उसको नियमानुसार दफनाया जाए। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि गौवंश संरक्षण केंद्र वनाए जाने हेतु एसडीएम से समन्वय कर जमीन की व्यवस्था सुनिश्चित करें। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी कंडारकर कमल किशोर देशभूषण,मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ जितेंद्र गुप्ता, तहसीलदार, जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका, खण्ड विकास अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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