मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। पचेंडा रोड स्थित पी.आर. पब्लिक स्कूल में 15 अगस्त का राष्ट्रीय पर्व देशभक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रबंधक अशोक सिंघल और प्रधानाचार्य अनघ सिंघल द्वारा ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। विद्यालय परिसर देशभक्ति के नारों और तिरंगे की आभा से गौरवान्वित दिखाई दिया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत, कविताएँ, भाषण, नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को याद किया। विद्यार्थियों ने अपने ओजस्वी वक्तव्यों के माध्यम से राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया।

विद्यालय प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों को स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ से परिचित कराते हुए कहा कि देश की प्रगति में प्रत्येक नागरिक की ईमानदारी, अनुशासन और जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। हमें अपने देश की एकता, अखंडता, स्वच्छता और विकास में अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से ईमानदारी, अनुशासन, परिश्रम एवं राष्ट्रप्रेम को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। विद्यार्थियों ने देश की एकता, अखंडता और गौरव को बनाए रखने का संकल्प लिया।विद्यालय प्रबंधक अशोक अशोक सिंघल ने विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि देश का भविष्य आज के बच्चों के हाथों में है। यदि विद्यार्थी अपने कर्तव्यों को समझकर आगे बढ़ें, तो भारत को विश्व के अग्रणी राष्ट्रों में स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आज के कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न करवाने में प्रवीण कुमार दिव्या शर्मा, शंकर शर्मा, शिखा ठाकुर, विश्व बंधु शर्मा, आंचल गुप्ता, विशांक त्यागी, दीपक मलिक, चेतना मल्हन, राखी पाल आदि का विशेष योगदान रहा। आज के कार्यक्रम का संचालन आर्य कौशिक और कृष्ण गोयल द्वारा किया गया।

मानसून ऋतु-2026 के दौरान प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 8% अधिक वर्षा के बावजूद प्रदेश के 37 जिलों में औसत से कम वर्षा
लखनऊ/मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। मानसून ऋतु (01 जून – 30 सितम्बर) 2026 के दौरान उत्तरोत्तर प्रबल होती एल-नीनो परिस्थितियों के दृष्टिगत मानसून ऋतु के प्रथम चरण (जून-जुलाई) के दौरान प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा के बावजूद मानसून ऋतु के द्वितीय चरण (अगस्त-सितम्बर) के दौरान तटस्थ धनात्मक हिन्द महासागरीय द्विध्रुव एवं हिन्द महासागर में बने कुल 10






