मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। ग्राम रोहाना कलां के दर्जनों किसानों ने अपर जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर को शिकायती पत्र के माध्यम से क्षेत्र की भूमि अधिग्रहण को लेकर व्याप्त शंकाओं के निवारण कराए जाने की मांग की है। ग्राम रोहाना कलां तहसील सदर जिला मुजफ्फरनगर के सत्यवीर सिंह, योगेश कुमार, संजय त्यागी, राजेश्वर त्यागी आदि किसानों ने सरकार द्वारा प्रस्तावित शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे जो रोहाना कलां की भूमि से भी होकर गुजरेगा जिसमें रोहाना कलां के किसानों की 158 खसरा नम्बरान की भूमि अधिग्रहण सूची में अंकित हो चुकी है। के संबंध में कहा है कि ग्राम रोहाना कलां की 90 प्रतिशत भूमि नहर से सिंचित अति उपजाऊ भूमि है जिसके चले जाने से किसानों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अंकित सर्किल रेट भूमि की गुणवत्ता के आधार पर काफी कम है जबकि बाजार भाव बहुत अधिक है। इन किसानों ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि ग्राम रोहाना कलां एनसीआर में आता है हमें आज तक एनसीआर में आने का लाभ तो नजर नहीं आया बल्कि नुकसान कई दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि गांव के इन सभी किसानों की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में एनसीआर के अनुसार मुआवजा दिलाये जाने की कृपा करें ताकि ग्राम के सभी किसानों के नुकसान की भरपाई हो सके।
बता दें कि शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे योगी सरकार की एक महत्वाकांक्षी 6-लेन ग्रीनफील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर है जो पश्चिमी यूपी (शामली) को पूर्वांचल (गोरखपुर) से जोड़ेगा। लगभग 750 किलोमीटर लंबे इस मेगा प्रोजेक्ट की लागत ₹35,000 करोड़ है। यह यूपी के 22 जिलों से गुजरेगा और गंगा एक्सप्रेसवे सहित 5 प्रमुख एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। कहना गलत न होगा कि इस गोरखपुर एक्सप्रेसवे से पश्चिम से पूर्वांचल तक विकास को पंख लगेंगे। मुजफ्फरनगर जिले के चरथावल, पुरकाजी और बघरा ब्लॉकों के 16 गांव संशोधित सूची में प्रस्तावित है।
इस कॉरिडोर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर जिलों से पूर्वांचल तक का सफर करने वालों के लिए मुफीद होगा। राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से जनवरी में अधिकृत कंपनी ने सर्वे के बाद पहले फेस के लिए तीन जिलों के गांवों को सूचीबद्ध किया है।

रालोद दफ्तर की बदहाली पर कार्यकर्ताओं में आक्रोश, जयंत चौधरी तक पहुंचेगा मामला
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के सर्कुलर रोड स्थित जिला कार्यालय की बदहाली अब पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा और नाराजगी का विषय बनती जा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिस कार्यालय से पार्टी की गतिविधियों, बैठकों और संगठनात्मक कार्यक्रमों का संचालन होता है, वहां बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है।





