मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। करीब 32 वर्ष पूर्व रामपुर तिराहा कांड के समय उत्तराखण्ड आंदोलनकारियों से फर्जी हथियार बरामदगी मामले में आरोपी तत्कालीन थाना प्रभारी ब्रजकिशोर और उनके हमराह दो पुलिसकर्मियों को सीबीआई मामलों की सुनवाई करने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा नामित विशेष मजिस्ट्रेट एवं एसीजेएम प्रथम देवेन्द्र सिंह फौजदार ने दोषी मानते हुए डेढ वर्ष कैद की सजा सुनाई है।
रामपुर तिराहा कांड से संबंधित आपराधिक मामलों में सीबीआई द्वारा चार्जशीट दिए जाने के बाद उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा सीबीआई मामले की सुनवाई के लिए नामित विशेष मजिस्ट्रेट कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। सीबीआई के मामलों की सुनवाई करने के लिए विशेष नामित मजिस्ट्रेट एसीजेएम-प्रथम देवेन्द्र सिंह फौजदार ने इस मामले में सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार दो अक्टूबर 1994 को गांधी जयंती पर पृथक राज्य की मांग को लेकर राजघाट पर धरना प्रदर्शन के लिए जा रहे उत्तराखंड आंदोलनकारियों को मुजफ्फरनगर पुलिस ने तत्कालीन मुलायम सरकार के निर्देश पर छपार थाना क्षेत्र के अंतर्गत रामपुर तिराहे के निकट रोक लिया था। उस दौरान टकराव होने पर पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में सात आंदोलनकारियों की मौत हो गयी थी। इस मामले में पुलिस की ओर से अनेक अभियोग उत्तराखंड आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज किए गए थे, जिनमें एक मामला उनसे अवैध हथियार बरामदगी का भी था। पुलिस ने उत्तराखंड आंदोलनकारियों को हमलावर साबित करने के लिए उनसे हथियार बरामद करने का अभियोग तत्कालीन झिंझाना थाना प्रभारी ब्रज किशोर सिंह की ओर से दर्ज किया था। बाद में सभी मामलों की सीबीआई जांच हुई तो सीबीआई ने हथियार की बरामदगी को फर्जी मानकर हथियार बरामद करने वाले तत्कालीन झिंझाना थानाध्यक्ष ब्रज किशोर सिंह और उनके हमराहा पुलिसकर्मियों के खिलाफ फर्जी अभियोग दर्ज करने, फर्जी हथियार बरामदगी दिखाने, लोकसेवक के रूप में पदीय दायित्व का निर्वहन न करने, और षड्यंत्र में शामिल होने आदि आरोपों की धारा 120 बी, 182, 211, 218, भारतीय दंड विधान तथा शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के अंतर्गत चार्जशीट कोर्ट में दी थी। इस मामले की सुनवाई एसीजेएम प्रथम ( हाईकोर्ट द्वारा नामित विशेष सीबीआई मजिस्ट्रेट) देवेन्द्र फौजदार की कोर्ट में हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस, गवाहों के बयान एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस मुकदमे में आरोपी थाना झिंझाना के तत्कालीन एसओ ब्रजकिशोर सिंह, पुलिस कांस्टेबल उमेश चंद और अनिल कुमार को फर्जी हथियार बरामदगी मामले में धारा 120 बी, 182, 211, 218, (भारतीय दंड विधान) तथा धारा 25 (शस्त्र अधिनियम) के अंतर्गत दोषी करार दिया। सजा के प्रश्न पर सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अभियोजन अधिकारी धारा सिंह मीणा ने कहा कि अभियुक्तगणों द्वारा आपराधिक षड्यंत्र रचते हुए अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया, इसलिए उन्हें कड़ी सजा दी जानी चाहिए, वहीं बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि अभियुक्तों ने तीस वर्ष तक मुकदमे की लम्बी सुनवाई का सामना किया है, उनकी आयु भी अधिक है, इसलिए सजा सुनाने के समय मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाया जाना चाहिए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बात सुनने के बाद कोर्ट ने दोषी तीनों अभियुक्तों को डेढ़ वर्ष के कारावास की सजा एवं प्रत्येक अभियुक्त पर विभिन्न आपराधिक धाराओं में कुल 21 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।

गुड़ खांडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन पर संजय मित्तल ग्रुप का दबदबा कायम
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। गुड कारोबार के लिए एशिया भर में मशहूर मुजफ्फरनगर गुड मंडी के आढ़तियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था दी गुड खांडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन के द्रिवार्षिक चुनाव में मंगलवार को एक बार फिर से निवर्तमान अध्यक्ष संजय मित्तल के ग्रुप ने सभी 31 सदस्य पदों पर धमाकेदार जीत दर्ज कराई है, जबकि






