मुजफ्फरनगर। पालिका के 55 वार्डों में विकास कार्यों को पंख लगाने की दिशा में शुरू कवायदों के बीच 202 विकास कार्यों के टैंडरों का मामला विवादों में है। बीते छह माह से लटके इन कार्यों में मात्र 48 कार्य स्वीकृत हो पाये हैं। ऐसे में अब वार्डों में विकास कार्य लटकने के कारण सभासदों ने मुखर होकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने ईओ पर जान बूझकर नियम विपरीत करीब 50 टैंडर निरस्त करने के आरोप लगाते हुए चेयरपर्सन के समक्ष नाराजगी व्यक्त की और जांच कराने की मांग की। चेयरपर्सन ने एई निर्माण को मौके पर बुलाकर जानकारी ली और उन्हें फटकार लगाते हुए पुन: परीक्षण कर रिपोर्ट मांगी है।
शुक्रवार में करीब 30-35 सभासदों ने पालिका चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की और अपनी शिकायत रखते हुए आरोप लगाया कि करीब 50 ऐसे कार्यों की निविदा निरस्त कर दी, जो कि नियमानुसार सही थी। इनमें मात्र निविदा शुल्क के डीडी ईओ पालिका के नाम होने के कारण इन्हें स्वीकार नहीं किया, जबकि ऐसा कोई नियम नहीं है। सभासद राजीव शर्मा, मनोज वर्मा व मौ. खालिद आदि ने अपनी शिकायत में कहा कि ये निर्णय ईओ ने शासनादेश के खिलाफ जाकर लिया है और इससे उनके वार्डों के कार्य लटक गये हैं। चेयरपर्सन ने सभासदों की शिकायत पर एई निर्माण अखंड प्रताप व लिपिक अशोक ढींगरा को तत्काल तलब किया। बताया गया कि चेयरपर्सन ने एई से जानकारी मांगी तो वो संतोषजनक जवाब न देकर ईओ द्वारा टैंडर निरस्त करने की बात कहते रहे। सभासदों ने कहा कि यदि टैंडर निरस्त किये गये हैं तो ठेकेदारों द्वारा निविदा शुल्क के रूप में दिए डीडी वापस क्यों नहीं किये जा रहे और यदि ये पैसा रखा गया है तो निविदा स्वीकृत मानी जायेगी। उन्होंने इसमें जांच कराने की मांग की। इस दौरान सभासद राजीव शर्मा, मनोज वर्मा, मौ. खालिद, नवनीत गुप्ता, शौकत अंसारी, इरशाद हकीम, प्रशांत गौतम, बॉबी सिंह, ममता बालियान, शहजाद, नौशाद, नौशाद खां, अन्नू कुरैशी, रजत धीमान, रविकांत शर्मा, हनी पाल, सभासदपति विकल्प जैन, राजू आढती, नदीम खां मौजूद रहे।
इन्होंने कहा-
चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने सभासदों की शिकायत पर एई निर्माण को निरस्त टैंडरों का पुन: परीक्षण करते हुए रिपोर्ट देने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि अनावश्यक रूप से किसी वार्ड का विकास कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।
वहीं एई निर्माण अखंड प्रताप सिंह का कहना है कि पूर्व में जिन ठेकेदारों के टैंडर निरस्त किये गये हैं, उनमें से किसी ने भी कोई शिकायत निर्माण विभाग या अन्य स्तर पर नहीं की। आज चेयरपर्सन ने उन्हें बुलाकर जानकारी ली थी, इसमें नियमानुसार जानकारी उपलब्ध करा दी गई। कोई भी टैंडर नियमों के विपरीत निरस्त नहीं किया है। विभागीय लिपिक को आदेश देते हुए पत्रावलियां मंगाई गई हैं। इसके साथ करीब 160 कार्य के लिए रि-टैंडर कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।






