मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक पत्र लिखते हुए कहा है कि इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान भारतीय कृषि निर्यात को वैश्विक स्तर पर, विशेषकर यूरोपीय संघ (European Union) के बाजारों में, एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यावहारिक नीतिगत सुझावों की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। वर्तमान समय में हमारे देश के किसानों और कृषि उद्यमियों के पास वैश्विक बाजार में कदम रखने की अपार क्षमता है, लेकिन कुछ तकनीकी और विनियामक (Regulatory) बाधाओं के कारण वे अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इस संबंध में मेरे मुख्य सुझाव निम्नलिखित हैं:
1. अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं एवं पारस्परिक स्वीकृति: देश के हर प्रमुख कृषि निर्यात क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालाओं (Labs) की स्थापना की जाए। इसके साथ ही, भारत सरकार यूरोपीय संघ की प्रमाणन संस्थाओं के साथ एक ‘पारस्परिक स्वीकृति समझौता’ (Mutual Recognition Agreement) करे, जिससे भारतीय प्रयोगशालाओं द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट को यूरोप में सीधे मान्यता मिले। इससे खर्च कम होगा व बार-बार होने वाली जांच और उत्पाद रिजेक्ट होने का खतरा खत्म होगा।
2. तकनीकी विशेषज्ञ, सस्ता कर्ज और साझा सुविधाएं: कृषि आधारित उद्योगों और FPOs को यूरोपीय पर्यावरण, गुणवत्ता और पैकेजिंग मानकों को पूरा करने के लिए आधुनिक तकनीकों की सख्त जरूरत है। यह आधुनिक तकनीक कैसे हासिल हो और इसे जमीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाए, इसके लिए हर केंद्र पर विषय विशेषज्ञों (Technical Experts) की नियुक्ति की जाए, जो निर्यातकों को सीधा मार्गदर्शन दे सकें। इसके साथ ही, इन तकनीकों को अपनाने के लिए उद्योगों को सस्ता और रियायती कर्ज (Subsidized Loans) उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, जिला या क्लस्टर स्तर पर ‘साझा सुविधा केंद्र’ (Common Facility Centers) बनाए जाएं, जिनका उपयोग छोटे निर्यातक भी न्यूनतम शुल्क देकर विशेषज्ञों की देखरेख में कर सकें।
3. बदली नीतियों का ज्ञान: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नियम (जैसे यूरोप के पर्यावरण कानून) बहुत तेजी से बदलते हैं। सरकारी स्तर पर जिला स्तर पर नियुक्त विशेषज्ञों का सीधा संपर्क वाणिज्य मंत्रालय, APEDA और DGFT से होता है, जिससे वे नए नियमों को तुरंत जिला स्तर पर लागू करवा सकते हैं।
4. यूरोपीय पर्यावरण शर्तें और कार्बन सीमा शुल्क (CBAM) की तैयारी: यूरोप द्वारा लागू किए जा रहे कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) और सख्त पर्यावरण नियमों को देखते हुए भारतीय निर्यातकों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाए। हमारे कृषि उत्पाद इन शर्तों को पूरा कर सकें, इसके लिए कृषि और वाणिज्य मंत्रालय मिलकर एक गाइडलाइन तैयार करें।
5. उच्च शुल्क छूट वाले उत्पादों की प्राथमिकता: शुरुआती चरण में हमें रणनीतिक रूप से उन कृषि उत्पादों को चिन्हित और शॉर्टलिस्ट (छंटनी) करना चाहिए, जिन पर अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत अधिक शुल्क छूट (High Tariff Concessions) मिलती है। इन उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करने से निर्यातकों को तुरंत बड़ा बाजार और मुनाफा मिल सकेगा। यदि इन सुझावों को नीतिगत रूप से लागू किया जाता है, तो इससे न केवल देश का कृषि निर्यात बढ़ेगा बल्कि हमारे किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को भी एक मजबूत आधार मिलेगा।

श्रीराम कॉलेज में हुआ मॉ शाकुम्भरी अन्तरमहाविद्यालयी क्रिकेट(पुरूष) टूर्नामेंट का आगाज
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। श्रीराम कॉलेज, (स्वायत्तशासी) मुजफ्फरनगर में मॉं शाकुम्भरी विश्वविद्यालय, सहारनपुर की अंतरमहाविद्यालय क्रिकेट (पुरूष) वर्ग प्रतियोगिता का शुभारम्भ बडे हर्षोउल्लास से किया गया। इस अवसर पर मॉं शाकुम्भरी विश्वविद्यालय, सहारनपुर की तरफ से प्रतियोगिता के प्रवेक्षक के रूप में डा0 शरद चौधरी, श्रीराम कॉलेज की प्राचार्या डा0 प्रेरणा मित्तल, श्रीराम कॉलेज के आईक्यूएसी समन्वयक






