हरिद्वार (रिपोर्टर)। श्रीमहंत बिष्णु दास महाराज ने भागवत कथा का शुभारम्भ करते हुए कहा कि हर मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए भगवान की भक्ति में लीन रहना चाहिए। भागवत कथा सप्ताह का जिक्र करते हुए उन्होने कहा कि सच्चा सुख केवल भक्ति,ज्ञान और आत्मसंयम में ही निहित है। महंत विष्णु दास सेवा समिति सभागार में जारी गुरू स्मृति कथा ज्ञान यज्ञ के पाचवे दिन श्रद्वालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि मानव जीवन में हमेशा प्राणि मात्र के कल्याण के बारे में सोचना चाहिए। संसार रूपी भव सागर से पार जाना है तो हरि भजन में लगना पड़ेगा।

पांचवें दिन कथा व्यास चिन्मय बापू ने भक्ति और ज्ञान का समन्वय के बारे में विस्तार से बताया। श्री कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का वर्णन करते हुए उन्होने कहा कि भगवान ने हमेशा धर्म की रक्षा के लिए कार्य किया। उन्होंने ब्रह्मांड की संरचना और जीव के जीवन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते भगवान की भिन्न- भिन्न लीलाओं की कथा सुनाते हुए कहा कि मनुष्य जीवन केवल भौतिक सुखों के लिए नहीं, बल्कि आत्मज्ञान और मोक्ष प्राप्ति के लिए है। पांचवें दिन राजा प्रियव्रत और उनके वंशजों की कथा सुनाते हुए कहा कि जिन्होंने धर्मपूर्वक शासन किया और भगवान की भक्ति में जीवन व्यतीत किया। भगवान ऋषभदेव ने अपने जीवन से त्याग,वैराग्य और आत्मसंयम का संदेश दिया। वहीं भरत राजा की कथा यह सिखाती है कि यदि मन भगवान से हटकर किसी भी सांसारिक वस्तु में लग जाए, तो साधना में बाधा आ सकती है। कथा व्यास चिन्मयानंद बापूजी ने विभिन्न लीलाओं के माध्यम से भक्ति एवं ज्ञान की कथा का श्रद्वालुओं को श्रवण कराया। इस दौरान महंत सरयू दास भाव नगर, विमल दास गुजरात. श्रीमहंत प्रेम दास के अलावा श्रीमती चॉद, बृजमोहन सेठ, श्वेता, नितिन सेठ, वन्दना, भव्य एवं अनिरूद्व के अलावा पुनीत दास, घवेन्द्र दास, अमनदास, रामचन्द्र दास, गणेश, शालीग्राम, अमरदास, गौरव के अलावा उछाली आश्रम के सेवकगण के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्वालुगण मौजूद रहे।

जन जागरूकता अभियान के अंतर्गत छात्र-छात्राओं के बीच चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। किले के आला अधिकारियों के निर्देश पर बुधवार को विश्व पृथ्वी दिवस के उपलक्ष्य में “हमारी शक्ति-हमारा ग्रह” के अंतर्गत होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज प्रवेन्द्र दहिया की अध्यक्षता में चित्रकला प्रतियोगिता व शपथ/संकल्प कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डा राजीव कुमार के नेतृत्व में “माता भूमि: पुत्रो अहं पृथिव्या:” (धरती मेरी माता






