मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। सावन की भारी बारिश के बीच शिव चौक पर जलभराव ने कांवड़ियों की राह में मुश्किल खड़ी की, तब कागजी निर्देशों की जगह प्रशासनिक संवेदनशीलता धरातल पर तैरती नजर आई। कांवड़ पदयात्रियों के दर्द और सुरक्षा की परवाह करते हुए जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा दफ्तरों का आराम छोड़ खुद घुटने तक भरे पानी में उतर गए। शीर्ष अधिकारियों को मौके पर मुस्तैद और पानी में खड़ा देख मातहत अधिकारी भी तुरंत अलर्ट मोड पर आ गए और युद्धस्तर पर बचाव कार्य शुरू हुआ। अफसरों ने अत्याधुनिक पंपिंग मशीनों को मौके पर लगवाकर बारिश थमते ही पूरे पानी की रिकॉर्ड समय में निकासी सुनिश्चित की। खाकी और प्रशासन के इस अनूठे ‘देवदूत’ रूप ने न केवल कांवड़ यात्रा को बिना किसी विघ्न के सुरक्षित और सुचारु बनाए रखा, बल्कि लाखों शिवभक्तों का दिल भी जीत लिया।

निरीक्षण के दौरान डीएम व एसएसपी सहित प्रशासनिक टीम ने सीधे ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर व्यवस्थाएं संभालीं। जलभराव वाली सड़कों पर पानी निकासी का काम खुद सामने खड़े होकर पूरा कराया। डीएम उमेश कुमार मिश्रा और एसएसपी संजय कुमार ने शिवचौक स्थित कांवड़ कंट्रोल रूम पहुंचे। वहाँ सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे जनपद के कांवड़ मार्गों और संवेदनशील प्वाइंट्स की स्थिति को देखा गया।
एसएसपी ने सिस्टम संभाल श्रद्धालुओं में भरा जोश: वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने खुद सिस्टम संभालकर कांवड़ियों और आम श्रद्धालुओं से संवाद किया। उन्होंने शिवचौक व आसपास के सड़कों पर घुटनों तक भरे पानी के बीच चलकर शिवभक्तों को आश्वस्त किया और मार्गदर्शन किया। जलभराव वाले स्थलों से अत्याधुनिक मशीनों के जरिए पानी पूरी तरह से निकाल दिया गया है, जिसके बाद शिवचौक की परिक्रमा कांवड़ियों के लिए आसान हुई। डीएम भी जलभराव के बीच सड़कों पर रहे। शिवचौक का पानी कम होने तक दोनों अधिकारी ग्राउंड पर जमे रहें। मुजफ्फरनगर पुलिस और प्रशासन के इस मानवीय रुख, जमीनी सक्रियता और तत्काल राहत कार्य की बदौलत कांवड़ यात्रा 2026 निर्विघ्न, सुरक्षित और उल्लासपूर्ण माहौल में आगे बढ़ रही है।

मानसून ऋतु-2026 के दौरान प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 8% अधिक वर्षा के बावजूद प्रदेश के 37 जिलों में औसत से कम वर्षा
लखनऊ/मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। मानसून ऋतु (01 जून – 30 सितम्बर) 2026 के दौरान उत्तरोत्तर प्रबल होती एल-नीनो परिस्थितियों के दृष्टिगत मानसून ऋतु के प्रथम चरण (जून-जुलाई) के दौरान प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा के बावजूद मानसून ऋतु के द्वितीय चरण (अगस्त-सितम्बर) के दौरान तटस्थ धनात्मक हिन्द महासागरीय द्विध्रुव एवं हिन्द महासागर में बने कुल 10






