मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। ध्यान शिविर बंगलुरू आश्रम से आये वरिष्ठ शिक्षक महेश शर्मा जी की देखरेख में संपन्न हुआ, वही रुद्राभिषेक पूजा वैदिक धर्म संस्थान बेंगलुरु से पधारे पंडितों की देखरेख में संपन्न हुआ। ध्यान शिविर में, विवेक, वैराग्य, सम, दम, विवेक, तितिक्षा, समाधान आदि गुण कैसे विकसित होंगे इस पर विस्तार से प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के माध्यम से समझाया गया। चूंकि यह एडवांस मेडिटेशन प्रोग्राम था तो इसमें ध्यान की अनेक उन्नत तकनीकों से भी प्रतिभागियों को परिचित कराया गया।शिविर में चालीस प्रतिभागी उपस्थित रहे।
शिविर की खूबसूरती यह भी थी कि सभी प्रतिभागी पूरे पांच दिन मौन में रहे।

इन पांच दिनों में सभी प्रतिभागी पूरे दिन ध्यान की दुनिया या ज्ञान की दुनिया में ही डूबे रहे। सभी प्रतिभागी सुबह 6.30 बजे तैयार होकर शिविर स्थल बारातघर pachenda रोड स्थित बारातघर, गांधी कॉलोनी (भगत सिंह हॉल) में पहुंच जाते थे। उसके बाद रात्रि 8.30 बजे तक यहीं रुकते थे। बस एक घंटे के लिए नेचर वॉक का रहता था जो कि ज्यादातर प्रतिभागी गांधी वाटिका में करते थे। शिविर में महिला पुरुष एडवोकेट, बैंकर, चार्टर्ड, अकाउंटेट, इंजीनियर, राजनीतिज्ञ, व्यापारी, टीचर्स और किसानों ने भाग लिया।
मीडिया प्रभारी कान्ति राठी ने बताया कि शिविर की व्यवस्था में स्थानीय आर्ट ऑफ लिविंग के वालंटियर ललित शर्मा, संजीव जलोत्रा, राजेश छाबड़ा, राजीव जलोत्रा, पूजा, शालू, शैलेन्द्र, रामानंद शर्मा, धीरज बत्रा, टीना बत्रा, पूनम शर्मा, लक्षित शर्मा, पंकज नारंग, ध्रुव गौतम आदि लगे हुए थे। जिला प्रमुख शिखी व संजीव जलोत्रा के देखरेख में सारी व्यवस्थाएं हुई और ललित शर्मा ने सभी प्रतिभागियों का और बाहर से आए हुए अतिथियों का धन्यवाद अदा किया। ध्यान शिविर में सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि श्री श्री रविशंकर जी की शिक्षाओं को घर घर तक पहुंचाएंगे।
क्योंकि अगर अध्यात्म जीवन में होगा तो जीवन मे प्यार, ममता, दया, सम्मान और देश का गौरव बढ़ेगा तथा भ्रष्टाचार, तनाव, नशा, हिंसा स्वमेव तिरोहित हो जाएगा।

मानसून ऋतु-2026 के दौरान प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 8% अधिक वर्षा के बावजूद प्रदेश के 37 जिलों में औसत से कम वर्षा
लखनऊ/मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। मानसून ऋतु (01 जून – 30 सितम्बर) 2026 के दौरान उत्तरोत्तर प्रबल होती एल-नीनो परिस्थितियों के दृष्टिगत मानसून ऋतु के प्रथम चरण (जून-जुलाई) के दौरान प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा के बावजूद मानसून ऋतु के द्वितीय चरण (अगस्त-सितम्बर) के दौरान तटस्थ धनात्मक हिन्द महासागरीय द्विध्रुव एवं हिन्द महासागर में बने कुल 10






