नई दिल्ली (रिपोर्टर)। शुक्रवार को कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) द्वारा रबी विपणन वर्ष 2027-28 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारण के संबंध में अम्बेडकर भवन में आयोजित बैठक में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक एवं पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने आयोग को किसानों के हित में महत्वपूर्ण सुझाव प्रेषित किए। धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि रबी फसलों का एमएसपी किसानों की वास्तविक उत्पादन लागत के आधार पर निर्धारित किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि एमएसपी का निर्धारण सी-2 लागत पर न्यूनतम 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर किया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य प्राप्त हो सके।
उन्होंने कहा कि डीजल, बिजली, उर्वरक, बीज, कीटनाशक एवं मजदूरी की लागत में लगातार वृद्धि हुई है, जिसे एमएसपी निर्धारण में समुचित महत्व दिया जाना चाहिए। साथ ही गेहूं, चना, मसूर, जौ तथा सरसों जैसी प्रमुख रबी फसलों के समर्थन मूल्य में लागत वृद्धि के अनुरूप पर्याप्त बढ़ोतरी की जानी चाहिए। पीजेंट वेलफेयर के अध्यक्ष अशोक बालियान ने यह भी सुझाव दिया कि केवल एमएसपी घोषित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकारी खरीद व्यवस्था को मजबूत बनाकर किसानों से प्रभावी खरीद सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, असामान्य वर्षा, ओलावृष्टि तथा अन्य प्राकृतिक जोखिमों को भी एमएसपी निर्धारण का महत्वपूर्ण आधार बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कम पानी वाली फसलों को प्रोत्साहित करने हेतु दलहन एवं तिलहन फसलों के एमएसपी को अधिक आकर्षक बनाया जाना चाहिए, जिससे फसल विविधीकरण और जल संरक्षण दोनों को बढ़ावा मिल सके। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक को आशा है कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग किसानों के सुझावों पर गंभीरता से विचार कर रबी फसलों के लिए लाभकारी एवं न्यायसंगत एमएसपी की संस्तुति करेगा। इस अवसर पर धर्मेंद्र मलिक ने एक सुझाव पत्र भी कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के अध्यक्ष को दिया।

रालोद दफ्तर की बदहाली पर कार्यकर्ताओं में आक्रोश, जयंत चौधरी तक पहुंचेगा मामला
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के सर्कुलर रोड स्थित जिला कार्यालय की बदहाली अब पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा और नाराजगी का विषय बनती जा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिस कार्यालय से पार्टी की गतिविधियों, बैठकों और संगठनात्मक कार्यक्रमों का संचालन होता है, वहां बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है।





